जमशेदपुर के काशीडीह में 50 हजार मिट्टी के घड़ों से आकार ले रहा दुर्गा पूजा पंडाल

काशीडीह दुर्गा पूजा मैदान में तीन आकार के 50 हजार से अधिक मिट्टी के घड़ों और बांस की कामाची से पर्यावरण अनुकूल पंडाल तैयार किया जा रहा है।

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जमशेदपुर के काशीडीह में मिट्टी के घड़ों से तैयार किया जा रहा दुर्गा पूजा पंडाल

जमशेदपुर के काशीडीह दुर्गा पूजा मैदान में इस बार मिट्टी के घड़ों से विशेष पंडाल तैयार किया जा रहा है। निर्माण में तीन अलग-अलग आकार के 50 हजार से अधिक घड़ों का इस्तेमाल हो रहा है। पंडाल का मुख्य प्रवेश द्वार और ऊपरी हिस्सा भी घड़ों से सजाया जा रहा है, जिससे पारंपरिक मिट्टी शिल्प को आयोजन की प्रमुख थीम बनाया गया है।

काशीडीह मैदान में ठाकुर प्यारा सिंह धुरंधर सिंह क्लब वर्ष 1960 से दुर्गा पूजा आयोजित कर रहा है। क्लब हर वर्ष अलग थीम पर पंडाल बनाता है। इस बार मिट्टी से जुड़ी पुरानी जीवनशैली और कारीगरी को सामने लाने के उद्देश्य से घड़ों का चयन किया गया है। आयोजन से जुड़े लोगों ने पंडाल को पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल बताया है।

पंडाल को आकार देने के लिए पश्चिम बंगाल के कोंटाई से करीब 25 शिल्पकार जमशेदपुर आए हैं। कारीगर घड़ों को सावधानी से एक-दूसरे के साथ जोड़ रहे हैं, ताकि सजावट के दौरान वे टूटें नहीं। निर्माण में घड़ों के साथ बांस की सूखी कामाची का भी उपयोग किया गया है।

मुख्य शिल्पकार के अनुसार, सभी घड़े कोंटाई से लाए गए हैं। वहां की मिट्टी से बने घड़ों को मजबूत बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे पंडाल निर्माण में सुविधा मिल रही है। घड़ों की बनावट और उन्हें जोड़ने की तकनीक के कारण पंडाल में स्थानीय सामग्री पर आधारित हस्तकला का स्वरूप उभर रहा है।

आयोजकों के मुताबिक, पंडाल तैयार करने की अनुमानित लागत करीब 30 लाख रुपये है। संरक्षक अभय सिंह ने कहा कि इसका डिजाइन कृत्रिम बुद्धिमत्ता से नहीं, बल्कि कारीगरों के मानवीय कौशल से तैयार हुआ है। उनका कहना है कि थीम के माध्यम से मिट्टी की पहचान और उसके पारंपरिक उपयोग की ओर ध्यान दिलाने का प्रयास किया गया है।

घड़ों से बने ढांचे की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि भीड़ या असावधानी से सजावट को नुकसान न पहुंचे। शारदीय नवरात्र के दौरान शहर में कई थीम आधारित पंडाल बनाए जा रहे हैं, लेकिन काशीडीह का यह निर्माण बड़ी संख्या में मिट्टी के घड़ों और पारंपरिक शिल्प के प्रयोग के कारण अलग पहचान बना रहा है।