चतरा जिले के इटखोरी स्थित बीआरसी भवन में संपूर्णा कार्यक्रम के तहत माइक्रो डायलॉगिंग गतिविधि आयोजित की गई। कार्यक्रम में बच्चों के समग्र विकास के साथ उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के तरीकों पर अधिकारियों, प्रतिनिधियों और समुदाय के सदस्यों ने विचार साझा किए।
संवाद का केंद्र बच्चों की मनोदशा को समझना और उनकी सामाजिक तथा भावनात्मक जरूरतों की पहचान करना रहा। प्रतिभागियों ने स्थानीय स्तर पर बच्चों के सामने आने वाली चुनौतियों और आवश्यकताओं पर चर्चा की। इसके लिए समुदाय के अनुभवों तथा सुझावों को जानने की प्रक्रिया को महत्व दिया गया।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि बच्चों के अनुकूल और सहयोगपूर्ण वातावरण के निर्माण में परिवार तथा समुदाय की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। माइक्रो डायलॉगिंग के माध्यम से समुदाय के सदस्यों से सीधा संवाद किया गया, ताकि बच्चों से जुड़े स्थानीय विषयों को उनके नजरिये से समझा जा सके।
संवाद प्रक्रिया का संचालन संपूर्णा कंसोर्टियम की अमृता प्रजापति और पप्पू कुमार तथा पीरामल फाउंडेशन की मेघा ने किया। गतिविधि में इटखोरी के प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी कैलाश पति पातर, प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी दीपक मेहरा और अन्य संबंधित लोग उपस्थित रहे।
आयोजन में एकतरफा जानकारी देने के बजाय सहभागिता आधारित चर्चा को प्राथमिकता दी गई। समुदाय के लोगों से उनके विचार, अनुभव और सुझाव लिए गए। इस प्रक्रिया के जरिए बच्चों के विकास से जुड़े विषयों पर परिवार, समुदाय और स्थानीय स्तर के अधिकारियों के बीच समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता रेखांकित की गई।
संपूर्णा कार्यक्रम के उद्देश्यों के अनुरूप हुई इस गतिविधि में संवाद और सामुदायिक सहयोग को बच्चों के समग्र विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। आयोजन से सामने आए स्थानीय अनुभवों और जरूरतों को समझने की कोशिश की गई, जिससे बच्चों के लिए अधिक संवेदनशील और सहयोगी परिवेश तैयार करने की दिशा में काम किया जा सके।