सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम ने एचआईवी नियंत्रण से जुड़े तीन प्रमुख मानकों पर 95 फीसदी लक्ष्य हासिल कर राज्य में पहला स्थान प्राप्त किया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सिमडेगा ने भी यही उपलब्धि दर्ज की है। इन मानकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना, एचआईवी से प्रभावित लोगों की पहचान करना और उन्हें समय पर उपचार से जोड़ना शामिल है।
सरायकेला-खरसावां में लक्ष्य हासिल करने के लिए समुदाय स्तर तक एचआईवी संबंधी सेवाओं को मजबूत किया गया। लक्षित हस्तक्षेप कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों तक पहुंचने की गतिविधियां चलाई गईं। इसके साथ समुदाय आधारित निगरानी और विशेष जांच शिविरों का आयोजन किया गया, ताकि अधिक लोगों को जांच की सुविधा मिल सके और जरूरतमंद व्यक्तियों की समय रहते पहचान हो।
रणनीति के दूसरे हिस्से में जांच के दौरान एचआईवी से संक्रमित पाए गए व्यक्तियों को तत्काल उपचार से जोड़ने पर ध्यान दिया गया। मरीज उपचार के दायरे में बने रहें, इसके लिए नियमित संपर्क और निगरानी की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया। इसका उद्देश्य पहचान के बाद इलाज शुरू होने में देरी को कम करना था।
तीसरे स्तर पर मरीजों की समयबद्ध वायरल लोड जांच और लगातार निगरानी की गई। इससे उपचार की प्रगति पर नजर रखने और मरीजों के स्वास्थ्य प्रबंधन को नियमित बनाए रखने में सहायता मिली। जिला प्रशासन ने इस उपलब्धि को विभिन्न विभागों और स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़े लोगों के समन्वित प्रयास का परिणाम बताया है।
उपायुक्त नितिश कुमार सिंह के अनुसार, बेहतर समन्वय, निरंतर निगरानी और पूरी टीम के सामूहिक प्रयास से जिले को यह सफलता मिली। उन्होंने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, परियोजना निदेशक, स्वास्थ्यकर्मियों, कार्यक्रम टीम और सामुदायिक सहयोगियों को उपलब्धि के लिए बधाई दी।
प्रशासन ने कहा है कि जिले में एचआईवी को लेकर जागरूकता, जांच, उपचार और फॉलो-अप से जुड़ी सेवाओं को आगे भी मजबूत किया जाएगा। समुदाय तक सेवाओं की पहुंच बनाए रखना और पहचान के बाद प्रभावित लोगों को लगातार उपचार उपलब्ध कराना इस प्रयास का प्रमुख हिस्सा रहेगा।