एनपीयू कुलपति के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर अगले आदेश तक रोक

राज्यपाल सह कुलाधिपति ने नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दिनेश कुमार सिंह के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।

2 मिनट पढ़ें 3 बार पढ़ी गई
नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दिनेश कुमार सिंह की फाइल तस्वीर

पलामू स्थित नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दिनेश कुमार सिंह के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है। यह कार्रवाई राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार के निर्देश पर की गई। लोकभवन की ओर से इस संबंध में पत्र जारी होने की जानकारी दी गई है।

राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव डॉ. नितिन मदन कुलकर्णी ने रोक लगाए जाने की पुष्टि की है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, कुलपति के विरुद्ध मिली वित्तीय अनियमितता संबंधी शिकायतों, विशेष अंकेक्षण में दर्ज आपत्तियों और लोकभवन के निर्देशों की कथित अवहेलना से जुड़े विषयों को कार्रवाई के दौरान ध्यान में रखा गया है।

राज्यपाल के निर्देश पर झारखंड वित्त विभाग ने विश्वविद्यालय का विशेष अंकेक्षण कराया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अंकेक्षण में 3 मार्च 2025 से जनवरी 2026 के बीच हुए 47 करोड़ 21 लाख 16 हजार रुपये के खर्च पर आपत्तियां दर्ज की गईं। इनमें 19 लाख 64 हजार 126 रुपये को वसूली योग्य बताए जाने का उल्लेख है।

रिपोर्ट में करीब पांच करोड़ रुपये के भुगतान से जुड़े मामलों पर भी सवाल उठाए गए हैं। कुलपति के कार्यकाल में किए गए 1 करोड़ 10 लाख 20 हजार 752 रुपये के एक भुगतान को अंकेक्षक द्वारा गबन की श्रेणी में रखने की बात कही गई है। इसके अलावा जीएसटी से जुड़े 1 करोड़ 51 लाख 39 हजार 128 रुपये और डिजिटलीकरण मद में 2 करोड़ 68 लाख 73 हजार 790 रुपये के भुगतान पर भी आपत्ति बताई गई है।

ये सभी बिंदु अंकेक्षण की आपत्तियां और शिकायतों में लगाए गए आरोप हैं। संबंधित पक्ष का जवाब तथा सक्षम प्राधिकार का अंतिम निष्कर्ष सामने आने से पहले इन्हें सिद्ध अनियमितता नहीं माना जाना चाहिए। फिलहाल जारी आदेश का प्रभाव कुलपति के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर रोक तक सीमित है।

मामले में पलामू के सांसद वीडी राम की लिखित शिकायत का भी उल्लेख किया गया है। इसके बाद छात्र संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने 2 सितंबर 2026 को राज्यपाल को दस्तावेज और अन्य साक्ष्य सौंपने का दावा किया था। कुलपति का करीब डेढ़ वर्ष का कार्यकाल शेष बताया गया है।