धनबाद में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर मंगलवार को जागरूकता रैली निकाली गई। जिला नवभारत साक्षरता समिति और झारखंड राज्य साक्षरता कर्मचारी महासंघ की धनबाद इकाई ने संयुक्त रूप से इसका आयोजन किया। शहर के विभिन्न हिस्सों में हुए कार्यक्रमों के बीच रैली के माध्यम से लोगों को पढ़ाई के महत्व से जोड़ने का प्रयास किया गया।
प्रतिभागियों ने “साक्षर धनबाद, शिक्षित धनबाद” और “पढ़ी-लिखी माता, घर की भाग्य विधाता” जैसे संदेशों के जरिए आम लोगों को जागरूक किया। आयोजन का जोर केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं था। इसमें शिक्षा के साथ स्वास्थ्य और समाज से जुड़े विषयों के प्रति नागरिक भागीदारी बढ़ाने की बात भी सामने रखी गई।
जिला कार्यक्रम समन्वयक प्रदीप चंद्र दा की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में पूर्व साक्षरता कर्मियों ने अपनी सेवा से संबंधित समस्याएं भी उठाईं। उनका कहना था कि वे वर्ष 1994-95 से समाज के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य और जनमुद्दों को लेकर काम करते रहे हैं। यह विवरण कार्यक्रम में शामिल कर्मियों की ओर से प्रस्तुत किया गया।
कर्मियों के अनुसार, साक्षर भारत कार्यक्रम के तहत वर्ष 2009-10 से 2018 तक धनबाद जिले के लगभग 363 लोक शिक्षा केंद्र संचालित थे। इन केंद्रों में 726 साक्षरता प्रेरक काम करते थे और प्रत्येक केंद्र पर एक महिला तथा एक पुरुष प्रेरक की व्यवस्था थी। उन्होंने बताया कि मार्च 2018 में कार्यक्रम स्थगित होने के बाद उनका समायोजन नहीं किया गया।
रैली में शामिल पूर्व कर्मियों ने दावा किया कि उनका 23 महीने का मानदेय अब भी लंबित है। उन्होंने राज्य सरकार से इस विषय पर विचार करने और मानदेय तथा समायोजन से जुड़ी समस्याओं का समाधान निकालने की अपील की। कार्यक्रम ने इस तरह साक्षरता के सार्वजनिक संदेश के साथ पूर्व कर्मियों की रोजगार-संबंधी चिंताओं को भी सामने रखा।
आयोजन में साक्षरता अभियान से जुड़े कई कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान दिवंगत पूर्व मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू की स्मृति में दो मिनट का मौन भी रखा गया। रैली का समापन शिक्षा के प्रसार और सामाजिक विषयों पर जागरूकता बनाए रखने के संदेश के साथ हुआ।