झारखंड के सरकारी स्कूलों के लिए तैयार होगा ‘अबुआ जादुई पिटारा’, स्थानीय परिवेश से जुड़ेगी पढ़ाई

बाल वाटिका से कक्षा पांच तक के बच्चों की पढ़ाई को रोचक और व्यावहारिक बनाने के लिए स्थानीय संसाधनों पर आधारित टीचिंग-लर्निंग मटेरियल किट विकसित की जा रही है।

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झारखंड के सरकारी स्कूलों में प्राथमिक स्तर की पढ़ाई को अधिक रोचक, व्यावहारिक और स्थानीय परिवेश से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने बाल वाटिका से कक्षा पांच तक के बच्चों के लिए नया टीचिंग-लर्निंग मटेरियल किट विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की है। प्रस्तावित किट को ‘अबुआ जादुई पिटारा’ नाम दिया गया है।

इस पहल पर विचार करने के लिए रांची स्थित जेसीईआरटी में हाल में एक बैठक हुई। इसमें राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आए शिक्षकों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य बच्चों की उम्र, पाठ्यक्रम और विकास संबंधी जरूरतों के अनुरूप ऐसी शिक्षण सामग्री का खाका बनाना था, जिसका कक्षा में आसानी से उपयोग किया जा सके।

प्रस्तावित पिटारे की सामग्री झारखंड की भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी। इसके लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और उपकरणों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। कोशिश है कि बच्चों को परिचित परिवेश से जुड़े उदाहरणों और गतिविधियों के माध्यम से विषय समझने का अवसर मिले।

बैठक के दौरान शिक्षकों और विशेषज्ञों ने झारखंड में पहले से उपलब्ध टीएलएम किट, एनसीईआरटी के सुझाए गए ‘जादुई पिटारा’ तथा दूसरे राज्यों में इस्तेमाल हो रही शिक्षण सामग्रियों का अध्ययन किया। इस तुलना के आधार पर बच्चों के बौद्धिक और मानसिक विकास में सहायक सामग्रियों के चयन के मानदंड तय किए गए।

चर्चा को केवल सैद्धांतिक स्तर तक सीमित नहीं रखा गया। शिक्षकों ने कुछ चुनी हुई शिक्षण सामग्रियां स्वयं तैयार कीं और कक्षाओं में उनके संभावित उपयोग को समझने का प्रयास किया। सामग्री चुनते समय उसके आयु के अनुकूल होने, पाठ्यक्रम से जुड़ने और बच्चों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया गया।

टीचिंग-लर्निंग मटेरियल में खेल-खिलौने, चार्ट, फ्लैशकार्ड और अलग-अलग मॉडल जैसे उपकरण शामिल हो सकते हैं। इनकी सहायता से शिक्षक अवधारणाओं को सरल तरीके से समझा सकते हैं। प्रस्तावित ‘अबुआ जादुई पिटारा’ से शिक्षकों को पढ़ाने में सहयोग मिलने के साथ बच्चों की सीखने की गति, रुचि और कक्षा में सहभागिता बेहतर होने की उम्मीद जताई गई है।