देवघर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में झारखंड के नर्सिंग कर्मियों के लिए दो दिवसीय आपातकालीन जीवन रक्षक प्रशिक्षण आयोजित किया गया। नेशनल इमरजेंसी लाइफ सपोर्ट (एनईएलएस) प्रोवाइडर कोर्स में राज्य के विभिन्न जिलों से आए 28 नर्सिंग कर्मियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के एनईएलएस स्किल सेंटर में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के डिजास्टर मैनेजमेंट सेल के सहयोग से हुआ।
प्रशिक्षण का उद्घाटन एम्स देवघर के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. डॉ. नितिन गंगाने ने किया। उन्होंने आपात स्थिति की समय पर पहचान और तत्काल उचित कार्रवाई को मरीज की जान बचाने के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक मरीजों की देखभाल में नर्सों की अग्रिम भूमिका को देखते हुए ऐसा व्यावहारिक प्रशिक्षण जरूरी है।
दो दिनों के दौरान प्रतिभागियों को अलग-अलग स्किल स्टेशन पर अभ्यास कराया गया। इसमें वयस्क और शिशु मैनिकिन पर कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन यानी सीपीआर, एयरवे प्रबंधन, बैग-मास्क वेंटिलेशन और डिफिब्रिलेटर के इस्तेमाल का प्रशिक्षण शामिल था। आपात परिस्थितियों को समझने और उनमें प्रतिक्रिया देने के लिए हाई-फिडेलिटी सिमुलेशन मैनिकिन का भी उपयोग किया गया।
प्रशिक्षकों ने नर्सिंग कर्मियों को छोटे समूहों में अभ्यास कराया और उनके प्रदर्शन पर व्यक्तिगत प्रतिक्रिया दी। इस पद्धति का उद्देश्य प्रत्येक प्रतिभागी को जीवन रक्षक प्रक्रियाओं को स्वयं करके समझने का अवसर देना था। कार्यक्रम में डीन एकेडमिक्स प्रो. हरमिंदर सिंह, उप निदेशक प्रशासन अभिक दास और कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्राचार्य डॉ. वसंता कल्याणी ने भी अपने अनुभव साझा किए।
प्रो. डॉ. संजय कुमार ने बताया कि झारखंड में एनईएलएस कार्यक्रम के तहत केंद्रीय पर्यवेक्षक की मौजूदगी में इस प्रकार का प्रशिक्षण पहली बार आयोजित हुआ है। संस्थान के अनुसार, पाठ्यक्रम से आपातकालीन और ट्रॉमा देखभाल से जुड़ी सेवाओं को मजबूत करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
एम्स देवघर का कहना है कि प्रशिक्षित नर्सिंग कर्मियों की व्यावहारिक तैयारी बेहतर होने से राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में आपात प्रतिक्रिया की गुणवत्ता और मरीजों के उपचार परिणामों में सुधार हो सकता है। कार्यक्रम में प्रतिभागियों को समय पर भेजने के लिए राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों और संबंधित सिविल सर्जनों के सहयोग का भी उल्लेख किया गया।