झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में वाम दलों का पांच दिवसीय राज्यव्यापी अभियान 28 सितंबर से शुरू हो गया। यह अभियान शहीद भगत सिंह की जयंती से गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर तक चलेगा। अभियान में एसआईआर की प्रक्रिया रोकने, ज्ञानेश कुमार को हटाने और चुनाव आयोग के गठन की व्यवस्था बदलने की मांग उठाई जाएगी।
अभियान की घोषणा रांची स्थित सीपीएम राज्य कार्यालय में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में की गई। इसमें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भाकपा (माले), फॉरवर्ड ब्लॉक, आरएसपी और एसयूसीआई (सी) के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रेस वार्ता में प्रकाश विप्लव, मनोज भक्त, अजय सिंह और विमल दास उपस्थित थे।
वाम नेताओं ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय समिति की व्यवस्था की मांग दोहराई। उनके प्रस्ताव के अनुसार इस समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया जाना चाहिए। दलों का कहना है कि ऐसी प्रक्रिया से नियुक्ति को अधिक निष्पक्ष और लोकतांत्रिक बनाया जा सकेगा।
प्रेस वार्ता में नेताओं ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता प्रभावित होने का आरोप भी लगाया। उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए सर्वोच्च न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने और एसआईआर के दौरान निर्वाचन प्रक्रिया तथा मतदाता सूची से नाम हटने संबंधी आरोपों की अपनी निगरानी में जांच कराने की मांग की। ये वाम दलों के आरोप और मांगें हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि प्रस्तुत विवरण में नहीं है।
वाम दलों के नेताओं ने दावा किया कि झारखंड में एसआईआर के दौरान अलग-अलग कारणों से 63 लाख 24 हजार 116 मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। उनका कहना है कि इनमें कई विसंगतियां सामान्य मानवीय भूल या अभिलेखों की त्रुटियों से जुड़ी हो सकती हैं। उन्होंने आशंका जताई कि प्रक्रिया का असर अल्पसंख्यकों, आदिवासियों, दलितों, गरीबों, अशिक्षित लोगों और महिलाओं पर अधिक पड़ सकता है।
दो अक्टूबर तक प्रस्तावित अभियान के माध्यम से छहों दल इन मांगों को राज्य स्तर पर उठाएंगे। उपलब्ध जानकारी में अभियान के जिलेवार कार्यक्रमों, सभाओं या प्रदर्शन स्थलों का विवरण नहीं दिया गया है। एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राज्य में जारी राजनीतिक बहस के बीच वाम दलों ने अब संयुक्त अभियान का रास्ता अपनाया है।