जमशेदपुर में रात्रि गश्ती के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा दुकानों और सड़कों के पास मौजूद लोगों को हटाने तथा लाठियां चलाने का कथित वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस की कार्यशैली पर राजनीतिक सवाल उठे हैं। वीडियो में दिखाई दे रही कार्रवाई को लेकर विपक्ष के साथ सत्ता पक्ष से जुड़े नेता ने भी आपत्ति जताई है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया या वीडियो से संबंधित किसी जांच की जानकारी नहीं दी गई है।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस कार्रवाई पर जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि अपराध नियंत्रण आवश्यक है, लेकिन आम नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग इसका समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि रात्रि गश्ती के नाम पर दुकानों और सड़कों पर मौजूद लोगों को क्यों हटाया और पीटा जा रहा है।
मरांडी ने आरोप लगाया कि अपराधियों पर अंकुश लगाने के बजाय आम लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने भ्रष्टाचार या अपराधियों से मिलीभगत करने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों पर सख्ती दिखाई जाए तो राज्य की कानून-व्यवस्था में सुधार हो सकता है।
सीता सोरेन ने भी वायरल वीडियो के आधार पर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और अपराध नियंत्रण का उद्देश्य नागरिकों में भरोसा पैदा करना होना चाहिए, भय नहीं। उनके अनुसार पुलिस को अपनी सख्ती अपराधियों, भ्रष्ट तत्वों और अवैध कारोबार से जुड़े लोगों पर दिखानी चाहिए।
कांग्रेस नेता और पूर्व आईपीएस अधिकारी डॉ. अजय कुमार ने वीडियो में दिख रही कार्रवाई को अमानवीय और विचलित करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पेशेवर तरीके और कानूनी प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर जिम्मेदारी तय करने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अनुरोध किया।
वायरल वीडियो को लेकर अलग-अलग दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाओं ने प्रकरण को राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है। उपलब्ध जानकारी मुख्यतः वीडियो और नेताओं के सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई, पुलिस को क्या निर्देश मिले थे और वीडियो का पूरा संदर्भ क्या है, इन बिंदुओं पर आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।