कोडरमा जिले की जरगा पंचायत के सुदूर झरखी इलाके में बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए शिक्षक ब्रह्मदेव शर्मा कठिन परिस्थितियों के बीच नियमित रूप से विद्यालय पहुंच रहे हैं। घने जंगलों के बीच स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय सपहा तक आने-जाने का सुगम रास्ता नहीं है। बरसात के दिनों में वृंदाहा नदी पार करना इस यात्रा की सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है।
विद्यालय प्रखंड मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर है। ब्रह्मदेव शर्मा सुबह मोटरसाइकिल से निकलते हैं, लेकिन नदी के पास पहुंचने के बाद आगे का सफर पैदल तय करना पड़ता है। पानी बढ़ने पर वह कपड़े बदलकर, एक हाथ में जूते और दूसरे में बैग लेकर नदी पार करते हैं। तेज बहाव के दौरान यह रास्ता अधिक कठिन हो जाता है।
बारिश के मौसम में लगभग तीन महीने तक झरखी क्षेत्र में आवागमन की परेशानी बनी रहती है। नदी का जलस्तर बढ़ने पर गांव की पहुंच आसपास के इलाकों से प्रभावित होती है। इसके बावजूद शर्मा विद्यालय पहुंचने का प्रयास जारी रखते हैं, जहां विद्यार्थी उनकी प्रतीक्षा करते हैं।
ब्रह्मदेव शर्मा के अनुसार, वह पिछले 19 वर्षों से इस विद्यालय में पढ़ा रहे हैं। विद्यालय में वह अकेले शिक्षक हैं। लंबे समय से एक ही स्थान पर सेवा देने के कारण विद्यालय और वहां पढ़ने वाले बच्चों से उनका विशेष जुड़ाव बन गया है।
शर्मा का कहना है कि आवागमन की बाधाओं को आधार बनाकर वह छुट्टी ले सकते थे, लेकिन उन्होंने शिक्षण कार्य को जिम्मेदारी मानते हुए ऐसा नहीं किया। उनका मानना है कि इलाके के बच्चों की पढ़ाई और भविष्य से उनकी भूमिका सीधे जुड़ी हुई है। इसी कारण वह कठिन रास्ते के बावजूद विद्यालय जाना जारी रखते हैं।
सपहा विद्यालय की स्थिति सुदूर क्षेत्रों में शिक्षा तक पहुंच के साथ सुरक्षित आवागमन की आवश्यकता को भी सामने लाती है। यहां शिक्षक की नियमित उपस्थिति बच्चों की पढ़ाई का प्रमुख आधार है, जबकि बरसात में नदी पार करने की मजबूरी विद्यालय तक पहुंच को चुनौतीपूर्ण बनाए रखती है।