खनन राजस्व और सेस वसूली में धनबाद सबसे आगे, अगस्त तक राज्य को 9,877.89 करोड़ की आय

वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त तक खनिज रॉयल्टी, उपकर और अन्य शुल्कों से झारखंड को 9,877.89 करोड़ रुपये मिले। जिलों में धनबाद का योगदान सबसे अधिक बताया गया है।

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झारखंड में खनन गतिविधियों और राजस्व संग्रह को दर्शाती प्रतिनिधि तस्वीर

झारखंड में चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान खनन से जुड़े राजस्व संग्रह में धनबाद सबसे आगे रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट में राज्य सरकार के ताजा आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि अगस्त 2026 तक खनिज रॉयल्टी, उपकर और अन्य शुल्कों से कुल 9,877.89 करोड़ रुपये की आय दर्ज की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में राज्य में 21,879.99 करोड़ रुपये मूल्य का खनिज उत्पादन और उठाव दर्ज हुआ। खनन क्षेत्र से मिले राजस्व को वार्षिक लक्ष्य का 36.59 प्रतिशत बताया गया है। हालांकि वित्तीय वर्ष के छह महीने पूरे हो चुके हैं, संबंधित महीनों की समेकित रिपोर्ट अभी तैयार नहीं हो सकी है।

झारखंड मिनरल बेस्ड लैंड सेस के तहत अप्रैल से अगस्त तक 4,657.01 करोड़ रुपये की वसूली का उल्लेख भी किया गया है। साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र सरकार की ओर से पेश संशोधित विधेयक के बाद इस सेस की वसूली पर रोक लगा दी गई है। इससे आगे के राजस्व संग्रह पर असर पड़ने की स्थिति बन सकती है।

जिलावार आंकड़ों में धनबाद से 689.70 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की जानकारी दी गई है, जो सूचीबद्ध जिलों में सबसे अधिक है। चाईबासा के लिए 586.70 करोड़ रुपये और चतरा के लिए 568.34 करोड़ रुपये की वसूली दर्ज की गई है।

अन्य प्रमुख खनन जिलों में पश्चिमी सिंहभूम से 457.77 करोड़ रुपये का योगदान बताया गया है। बोकारो से 302.21 करोड़ रुपये और रामगढ़ से 301.33 करोड़ रुपये की प्राप्ति दर्ज की गई। ये आंकड़े राज्य के खनन राजस्व में अलग-अलग जिलों की हिस्सेदारी को सामने रखते हैं।

रिपोर्ट में कुछ जिलों के कमजोर प्रदर्शन का भी उल्लेख है, लेकिन उनके विस्तृत आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। ऐसे में वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में राजस्व संग्रह की दिशा आगामी समेकित रिपोर्ट और सेस से संबंधित व्यवस्था स्पष्ट होने के बाद अधिक साफ हो सकेगी।