गढ़वा जिले के खरौंधी प्रखंड में सोन नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटीय गांवों के किसानों की परेशानी बढ़ गई है। बाढ़ का पानी खेतों में पहुंचने के कारण करीब 50 एकड़ में लगी फसलों के प्रभावित होने की सूचना है। नदी के बीच एक टीले पर लगभग 50 गाय-बैल भी फंसे बताए गए हैं।
खोखा, चंदना, पिपरा और रजखड़ समेत कई गांवों पर बाढ़ का असर पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, धान के साथ अरहर और तिल की फसल पानी में डूब गई है। किसानों को आशंका है कि नदी का स्तर और बढ़ने पर तट के पास स्थित अधिक खेत इसकी चपेट में आ सकते हैं।
फसलों के अलावा सिंचाई के साधनों को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में लगाए गए करीब पांच मोटर और तीन समरसेबल पानी में डूब गए हैं। इससे मौजूदा नुकसान के साथ आगे खेती और सिंचाई की व्यवस्था को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
नदी के बीच स्थित टीले पर फंसे मवेशियों को लेकर स्थिति संवेदनशील बताई जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, बढ़े हुए पानी के कारण उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना कठिन हो गया है। अगर पानी टीले तक पहुंचता है तो वहां मौजूद गाय-बैलों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
प्रभावित किसानों ने बताया कि वे उधार लेकर धान, अरहर और तिल समेत दूसरी फसलों की बोआई करते हैं। उनका कहना है कि सोन नदी में आने वाली बाढ़ से उन्हें बार-बार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। ग्रामीणों ने पूर्व में प्रभावित किसानों को मुआवजा नहीं मिलने की शिकायत भी की है।
ग्रामीणों ने खरौंधी के प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचल अधिकारी से प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है। उन्होंने फसलों तथा डूबे हुए मोटर और समरसेबल के नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने के साथ टीले पर फंसे मवेशियों को सुरक्षित निकालने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की है।