खूंटी जिले में अड़की से उलिहातू जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित बीयारगाड़ा पुल की जर्जर हालत को लेकर चार पंचायतों के ग्रामीणों और ग्राम प्रधानों ने गुरुवार को सामूहिक ग्रामसभा की। संतोष नाग की अध्यक्षता में हुई बैठक में पुल की सुरक्षा और इससे जुड़े गांवों के आवागमन पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई गई।
ग्रामीणों का दावा है कि पुल के सभी 11 पिलर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और इसका भार अब मुख्य रूप से एक पिलर पर टिका है। ग्रामसभा में उपस्थित लोगों ने कहा कि मौजूदा स्थिति में पुल के टूटने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने प्रशासन से इसकी तकनीकी जांच कराने और समय रहते ठोस कदम उठाने की मांग की।
यह पुल भगवान बिरसा मुंडा के गांव उलिहातू को अड़की से जोड़ने वाले मार्ग पर है। ग्रामीणों के अनुसार, पुल क्षतिग्रस्त होने या आवागमन बंद होने की स्थिति में उलिहातू के साथ आसपास के अनेक गांवों का सीधा संपर्क प्रभावित हो सकता है। लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए करीब 15 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है।
ग्रामसभा में बताया गया कि संभावित असर बाड़ीनिजकेल, तिरला, तिनतिला और अड़की क्षेत्र के गांवों पर पड़ेगा। बारगी, हड़ामसेरंग, गुतुरा, गेरने, इचाहातू, तुबिद, सेल्दा, गसार, काईल, जोरोबेड़ा, लेपसेर और बेडाडीह सहित कई गांवों के लोगों के लिए यह पुल महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है।
ग्रामीणों के मुताबिक, पुल का निर्माण वर्ष 2012 में हुआ था, लेकिन बाद में समय पर इसकी मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं कराया गया। बैठक में लोगों ने इस स्थिति पर नाराजगी जताई और कहा कि पुल की बिगड़ती दशा को देखते हुए अब मरम्मत की आवश्यकता को टाला नहीं जाना चाहिए।
ग्रामसभा में ग्रामीणों ने बताया कि समस्या के संबंध में खूंटी के सांसद कालीचरण मुंडा, तमाड़ के विधायक विकास मुंडा और जिले के उपायुक्त को लिखित आवेदन दिया जा चुका है। उनका कहना है कि आवेदन देने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई दिखाई नहीं दी है।
रुमचु, बारगी, उलिहातू और तुबिद बाड़ी सहित चार पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीण तथा ग्राम प्रधान बैठक में शामिल हुए। सभा ने प्रशासन से पुल की वर्तमान स्थिति का आकलन कर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए शीघ्र मरम्मत या पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।