रांची में त्योहारी मौसम के बीच जनवितरण प्रणाली के कई लाभुकों को दाल, चीनी और रियायती वस्त्र नहीं मिल पाने की शिकायत सामने आई है। राजधानी की कुछ सरकारी राशन दुकानों की पड़ताल पर आधारित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर का चावल और गेहूं भी दुकानों तक देर से पहुंचा है। हालांकि नमक की आपूर्ति की गई है।
रिपोर्ट में राशन पर निर्भर लाभुकों ने बताया कि चीनी लंबे समय से नहीं मिल रही है और कई महीनों से दाल भी उपलब्ध नहीं है। उनका कहना है कि त्योहार के दौरान इन वस्तुओं की जरूरत बढ़ जाती है, इसलिए समय पर आपूर्ति नहीं होने से परिवारों की परेशानी बढ़ी है।
झारखंड में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत करीब 59.83 लाख राशन कार्डधारी बताए गए हैं। राज्य की मुख्यमंत्री दाल वितरण योजना और खाद्य सुरक्षा योजना के तहत ग्रीन कार्डधारकों को हर महीने एक किलोग्राम चना दाल एक रुपये में देने का प्रावधान है। रिपोर्ट में आपूर्ति नहीं होने के कारण लाभुकों तक दाल नहीं पहुंचने की बात कही गई है।
इसी तरह राज्य के लगभग 8.92 लाख अंत्योदय परिवारों को रियायती दर पर हर महीने एक किलोग्राम चीनी देने का प्रावधान बताया गया है। मीडिया रिपोर्ट का दावा है कि इन परिवारों को करीब दो वर्षों से चीनी नहीं मिली है। यह स्थिति दुकानों पर उपलब्ध सामग्री और योजना के निर्धारित लाभ के बीच अंतर को रेखांकित करती है।
सोना-सोबरन धोती-साड़ी वितरण योजना के तहत पात्र परिवारों को साल में दो बार दस रुपये प्रति वस्त्र की दर से एक साड़ी और एक धोती अथवा लुंगी दिए जाने का प्रावधान है। रिपोर्ट के मुताबिक, निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण इस बार वस्त्रों की आपूर्ति अभी तक नहीं हो सकी है।
एक राशन दुकानदार ने आपूर्ति नहीं मिलने को वितरण रुकने का कारण बताया। लाभुकों ने सरकार से दाल, चीनी, अनाज और वस्त्र समय पर उपलब्ध कराने की मांग की है। रिपोर्ट में विभाग या राज्य सरकार की ओर से आपूर्ति की संभावित तारीख अथवा स्थिति पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।