गढ़वा के खोखा और पडरच गांवों में मोबाइल नेटवर्क संकट, पेड़ों पर फोन रखने को मजबूर ग्रामीण

खरौंधी प्रखंड के दो गांवों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या से आपात संपर्क, ऑनलाइन पढ़ाई, बैंकिंग और सरकारी डिजिटल सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। ग्रामीणों ने स्थायी समाधान की मांग की है।

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गढ़वा के खोखा और पडरच गांवों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या से परेशान ग्रामीण

गढ़वा जिले के खरौंधी प्रखंड के सोन तटीय क्षेत्र में बसे खोखा और पडरच गांवों के लोग मोबाइल नेटवर्क की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, सामान्य रूप से फोन पर बात करने के लिए भी उन्हें ऊंचे स्थान या पेड़ों का सहारा लेना पड़ता है। कई बार मोबाइल में सिग्नल पाने के लिए लोग 20 से 30 फीट ऊंचे पेड़ों पर चढ़ते हैं।

खोखा गांव की कुमारी देवी की परेशानी ने स्थिति की गंभीरता सामने रखी है। उनका बच्चा दो दिनों से अस्पताल में भर्ती है और वहां से जरूरी फोन आने की संभावना है। नेटवर्क मिलने की उम्मीद में उन्होंने मोबाइल को पेड़ की टहनी से बांध दिया और खुद नीचे बैठकर कॉल का इंतजार करती रहीं।

ग्रामीणों का कहना है कि कमजोर नेटवर्क के कारण जरूरी संदेश समय पर नहीं मिल पाते। गांव में किसी महत्वपूर्ण घटना या आपात स्थिति की सूचना तत्काल संबंधित लोगों तक पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है। परिजनों और रिश्तेदारों से सामान्य बातचीत के लिए भी लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है।

इस समस्या का असर केवल फोन कॉल तक सीमित नहीं है। बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई, युवाओं के इंटरनेट आधारित काम, डिजिटल भुगतान, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं से जुड़ी ऑनलाइन सेवाएं भी बाधित होती हैं। कई जरूरी काम पूरे करने के लिए ग्रामीणों को ऐसे स्थानों पर जाना पड़ता है, जहां मोबाइल सिग्नल उपलब्ध हो।

स्थानीय लोगों के अनुसार, दूरदराज और सोन तटीय क्षेत्र में मजबूत संचार व्यवस्था नहीं होने से डिजिटल सुविधाओं का लाभ गांव तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंच पा रहा है। मोबाइल फोन अब शिक्षा, रोजगार, वित्तीय लेनदेन और आपात सेवाओं से जुड़ा माध्यम बन चुका है, इसलिए लंबे समय से बनी नेटवर्क की कमी दैनिक जीवन पर सीधा असर डाल रही है।

खोखा और पडरच के ग्रामीणों ने प्रखंड प्रशासन तथा संबंधित मोबाइल सेवा कंपनियों से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि क्षेत्र में मोबाइल टावर या दूसरी उपयुक्त तकनीकी व्यवस्था स्थापित कर स्थायी समाधान किया जाए, ताकि संपर्क के लिए पेड़ों पर चढ़ने या फोन को टहनियों से बांधने की मजबूरी समाप्त हो सके।