धनबाद, गोमो और कोडरमा रेलवे स्टेशनों पर आग से सुरक्षा के लिए एस्पिरेशन टाइप फायर डिटेक्शन एंड अलार्म सिस्टम लगाने की तैयारी की गई है। पहले चरण में इस व्यवस्था पर 7.62 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य स्टेशन के संवेदनशील हिस्सों में धुएं का जल्द पता लगाकर समय पर जरूरी कदम उठाने में सहायता करना है।
नई प्रणाली स्टेशन के सिग्नल रूम, रिले रूम और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों वाले अन्य महत्वपूर्ण कक्षों में लगाई जाएगी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, यह हवा को खींचकर उसमें मौजूद धुएं के छोटे कणों की पहचान करती है। सामान्य से अधिक धुआं मिलने पर सिस्टम तत्काल अलार्म देगा।
रेलवे स्टेशनों के साथ ट्रेनों में भी अग्नि सुरक्षा के उपकरण बढ़ाने की योजना है। पूर्व मध्य रेल के 250 कोचों में वाटर मिस्ट आधारित अग्निशामक लगाए जाएंगे। हालांकि किन ट्रेनों और किस श्रेणी के कोचों में ये उपकरण लगेंगे, इस बारे में अभी रेलवे की विस्तृत गाइडलाइन जारी नहीं हुई है।
वाटर मिस्ट अग्निशामक पानी की बहुत बारीक बूंदों का इस्तेमाल करता है। ये बूंदें आग के संपर्क में आते ही तेजी से वाष्पित होकर तापमान कम करने में मदद करती हैं। इस प्रक्रिया से बनने वाली भाप और धुंध आग के आसपास ऑक्सीजन की आपूर्ति घटाती है, जिससे आग बुझाने में सहायता मिलती है।
इस उपकरण में जहरीले रसायन या विषैली गैस का इस्तेमाल नहीं होने की बात कही गई है। सामान्य पानी की तुलना में इसकी बारीक फुहार आसपास रखी दूसरी वस्तुओं को अधिक गीला या खराब होने से भी बचा सकती है। इस कारण इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और कोच के भीतर इसके इस्तेमाल को उपयोगी माना जा रहा है।
धनबाद रेल क्षेत्र के लिए प्रस्तावित व्यवस्था का अहम पक्ष आग या धुएं की शुरुआती अवस्था में चेतावनी मिलना है। सिस्टम लगाने और कोचों का चयन पूरा होने के बाद ही इसके क्रियान्वयन की विस्तृत तस्वीर स्पष्ट होगी। फिलहाल योजना में तीन स्टेशनों और पूर्व मध्य रेल के 250 कोचों को शामिल किया गया है।