गढ़वा जिले के रंका पूर्वी और पश्चिमी वन क्षेत्रों में करीब 60 हाथियों की गतिविधि दर्ज की गई है। प्रकाशित विवरण के अनुसार, हाथी चार अलग-अलग झुंडों में जंगलों और आसपास के ग्रामीण इलाकों में विचरण कर रहे हैं। उनकी बढ़ती मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग ने प्रभावित गांवों के निवासियों से विशेष सावधानी बरतने को कहा है।
रंका पश्चिमी वन क्षेत्र में पांच और 10 हाथियों के दो झुंड बताए गए हैं। रंका पूर्वी क्षेत्र में 10 और 25 हाथियों के दो अन्य झुंड सक्रिय हैं। इनमें 25 हाथियों वाला बड़ा झुंड इसी सप्ताह छत्तीसगढ़ से झारखंड की सीमा में आया है। सीमावर्ती जंगलों के रास्ते हाथियों का दोनों राज्यों के बीच आवागमन होता रहता है।
वन विभाग की टीम हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है। इसके लिए क्विक रिस्पांस टीम भी गठित की गई है। विभाग व्हाट्सऐप के माध्यम से ग्रामीणों को हाथियों की लोकेशन की जानकारी दे रहा है, ताकि लोग समय रहते सतर्क हो सकें और उनके विचरण वाले रास्तों से दूरी बनाए रखें।
ग्रामीणों से कहा गया है कि हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम को जानकारी दें। बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के उनके करीब जाने, छेड़छाड़ करने या खदेड़ने का प्रयास नहीं करने की सलाह दी गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षित ढंग से और पर्याप्त संख्या में लोगों के साथ सक्षम होने पर ही कोई कदम उठाया जाए।
दक्षिणी डीएफओ एबिन बेनी अब्राहम ने ग्रामीणों से सतर्क रहने और जोखिम लेने के बजाय विभाग को सूचित करने की अपील की है। वन विभाग के मुताबिक हाथियों के हमले से जनहानि, संपत्ति या फसल को नुकसान होने पर मुआवजे का प्रावधान है और इससे जुड़ी प्रक्रिया को सरल किया गया है।
किसी नुकसान की स्थिति में ग्रामीणों को तस्वीरें लेकर संबंधित वनरक्षी को तुरंत सूचना देने को कहा गया है। इससे आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर मुआवजा उपलब्ध कराने की कार्रवाई शुरू की जा सकेगी। विभाग ने यह भी बताया है कि मुआवजे की राशि बढ़ाई गई है। फिलहाल निगरानी, समय पर सूचना और हाथियों से सुरक्षित दूरी को प्रमुख एहतियाती उपाय बताया गया है।