गढ़वा जिले के कई सुदूर इलाकों में मोबाइल टावर और इंटरनेट से जुड़ा ढांचा मौजूद होने के बाद भी लोगों को स्थिर नेटवर्क नहीं मिल रहा है। बड़गड़, बरडीहा और खरौंधी की कनेक्टिविटी संबंधी शिकायतों पर 26 सितंबर को हुई जिला टेलीकॉम समिति की बैठक में विशेष रूप से चर्चा की गई।
बैठक में प्रशासन ने मोबाइल सेवा को केवल सामान्य सुविधा नहीं, बल्कि आपातकालीन संपर्क और विधि-व्यवस्था के लिए भी जरूरी बताया। नेटवर्क कमजोर रहने पर ग्रामीणों को पुलिस तथा एंबुलेंस जैसी आवश्यक सेवाओं से संपर्क करने में परेशानी हो सकती है। संबंधित कंपनियों से प्रभावित क्षेत्रों की तकनीकी समस्या जांचने को कहा गया है।
खरौंधी थाना क्षेत्र और आसपास के कुछ स्थानों में कनेक्टिविटी की समस्या बनी हुई है। खोखा गांव के ग्रामीणों के अनुसार, सामान्य बातचीत के लिए भी कई बार ऐसी जगह तलाशनी पड़ती है जहां मोबाइल सिग्नल मिल सके। पूर्व में पेड़ पर चढ़कर नेटवर्क खोजने का एक वीडियो भी सामने आया था, हालांकि उसकी पुष्टि नहीं हुई थी।
बरडीहा थाना के आसपास भी मोबाइल सेवा बाधित होने की शिकायतें मिलती रही हैं। प्रशासन के सामने चिंता यह है कि थाने जैसे महत्वपूर्ण संस्थान के आसपास कमजोर नेटवर्क होने से सूचना मिलने, घटनास्थल से संपर्क करने और अधिकारियों के बीच तत्काल समन्वय पर असर पड़ सकता है।
बैठक में बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र की स्थिति पर भी विचार हुआ। दूरसंचार कंपनियों के प्रतिनिधियों ने वहां टावर बन जाने की जानकारी दी, लेकिन स्थानीय प्रशासनिक कार्यालयों के पास इसका पूरा विवरण नहीं था। उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने कंपनियों को टावर से संबंधित लिखित जानकारी देने का निर्देश दिया है। अब उसके संचालन, वास्तविक कवरेज और आसपास के गांवों तक सेवा की पहुंच की जानकारी जुटाई जा रही है।
कंपनियों ने माना कि कुछ प्रखंडों में टावर बने होने के बावजूद कनेक्टिविटी नहीं पहुंच रही है और कारणों की जांच कर समाधान का भरोसा दिया। जिले के कुछ स्थानों पर भारत नेट का काम अधूरा होने या रिचार्ज नहीं होने के कारण सेवा बंद रहने की बात भी सामने आई है। प्रशासन अब सेवा प्रदाताओं से इन बाधाओं की जांच कराकर नेटवर्क सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहा है।