गढ़वा समाहरणालय में शुक्रवार को आयोजित जनसुनवाई में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा के सामने अपनी समस्याएं रखीं। सुनवाई के दौरान करीब 30 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें आवास, राशन, पेंशन, बकाया मानदेय और जमीन विवाद से जुड़े मामले प्रमुख रहे। उपायुक्त ने संबंधित विभागों को आवेदनों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
कांडी प्रखंड के बलियारी निवासी सुमंत दूबे ने समुचित आश्रय नहीं होने की समस्या बताई। उनके आवेदन के अनुसार, वह प्लास्टिक लगाकर रह रहे हैं और राशन कार्ड नहीं होने से भोजन की व्यवस्था में भी परेशानी होती है। उन्होंने कम होती आंखों की रोशनी और वृद्धावस्था का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना, वृद्धावस्था पेंशन तथा राशन कार्ड का लाभ दिलाने का अनुरोध किया।
मेराल प्रखंड के खोरिडीह की अनामिका कुमारी ने लंबित मानदेय के भुगतान की मांग रखी। आवेदन में उन्होंने बताया कि वह दो सितंबर 2025 से 28 अक्टूबर 2025 तक उपायुक्त आवास में सफाई कर्मी के रूप में कार्यरत थीं। उच्च शिक्षा के लिए काम छोड़ने के बाद भी संबंधित अवधि का मानदेय नहीं मिलने की बात कहते हुए उन्होंने भुगतान कराने का आग्रह किया।
गढ़वा प्रखंड के धोगरगिहा निवासी शमशाद अंसारी ने इलेक्ट्रिक साइकिल, दिव्यांग पेंशन और आवास उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने अपने आवेदन में दिव्यांगता और कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण परिवार के भरण-पोषण में आ रही कठिनाइयों का उल्लेख किया। उनके माता-पिता भी वृद्ध हैं, जिससे परिवार की जरूरतें पूरी करना चुनौतीपूर्ण बताया गया।
मेराल प्रखंड के अधौरा निवासी मेघराज साव ने न्यायालय में विचाराधीन जमीन पर कथित रूप से जुताई और मकान निर्माण कराए जाने की शिकायत की। उनके अनुसार, मामले में अंचल अधिकारी और थाना प्रभारी से स्थल जांच रिपोर्ट मांगी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिपोर्ट लंबित रहने के दौरान दूसरे पक्ष ने जमीन पर काम कराया और प्रशासन से जांच की मांग की।
उपायुक्त ने अधिकारियों से शिकायतों के निपटारे में अनावश्यक देरी नहीं करने को कहा। उन्होंने जरूरतमंद, वृद्ध और दिव्यांग आवेदकों को पात्रता के अनुसार सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने तथा मामलों का पारदर्शी और समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि लोगों को समाधान के लिए बार-बार कार्यालय न आना पड़े।