झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो स्टील प्लांट टाउनशिप और शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सेल तथा सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की मांग वाली जनहित याचिका का निपटारा कर दिया है। अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड देखने के बाद कहा कि संबंधित अधिकारियों की ओर से कार्रवाई की जा रही है, इसलिए फिलहाल किसी अतिरिक्त निर्देश की आवश्यकता नहीं है।
चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत के अनुसार, कई मामलों में बेदखली के आदेश भी पारित किए जा चुके हैं। इस स्थिति में यह नहीं कहा जा सकता कि अतिक्रमण के मुद्दे पर अधिकारी पूरी तरह निष्क्रिय हैं।
खंडपीठ ने कहा कि जनहित याचिका का उद्देश्य अधिकारियों को कानून के अनुसार कार्रवाई के लिए सक्रिय करना है। इस मामले में अधिकारियों ने अतिक्रमण और आवंटित आवासों में निर्धारित अवधि से अधिक समय तक रहने की स्थिति से इनकार नहीं किया, बल्कि कार्रवाई शुरू होने और उसके जारी रहने की जानकारी दी।
याचिका में दावा किया गया था कि बोकारो स्टील प्लांट टाउनशिप और शहर के अलग-अलग इलाकों में सेल की करीब 500 एकड़ जमीन पर लगभग चार हजार कच्चे-पक्के मकान और खटाल बने हुए हैं। अदालत से इन अनधिकृत निर्माणों को हटाने के लिए आवश्यक कार्रवाई कराने का अनुरोध किया गया था।
अतिक्रमण के खिलाफ यह जनहित याचिका अधिवक्ता भगवान प्रसाद साहू ने दायर की थी। सुनवाई के दौरान सामने आए रिकॉर्ड और अधिकारियों की ओर से जारी कार्रवाई को ध्यान में रखते हुए अदालत ने याचिका निष्पादित कर दी।
याचिका का निपटारा होने के बावजूद जमीन से अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक प्रक्रिया जारी रहेगी। अदालत के निर्णय का आधार यही रहा कि संबंधित अधिकारी कार्रवाई कर रहे हैं और कुछ प्रकरणों में बेदखली के आदेश तक जारी किए जा चुके हैं।