झारखंड प्रशासनिक सेवा की संशोधित औपबंधिक वरीयता सूची जारी, आठ दिन में मांगी गई आपत्ति

राज्य सरकार ने झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की संशोधित औपबंधिक वरीयता सूची सार्वजनिक की है। संबंधित अधिकारी आठ दिन के भीतर प्रमाण सहित दावा या आपत्ति दे सकेंगे।

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रांची में राज्य सरकार ने झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की संशोधित औपबंधिक वरीयता सूची जारी कर दी है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से प्रकाशित यह सूची अभी औपबंधिक है। इस पर संबंधित अधिकारियों से निर्धारित अवधि के भीतर दावा या आपत्ति मांगी गई है।

विभाग के अनुसार, सूची को उच्च न्यायालय के न्यायादेशों और समय-समय पर हुए संशोधनों के आलोक में तैयार किया गया है। इसमें राज्य गठन के शुरुआती दौर से सेवा दे चुके अधिकारियों के साथ सेवानिवृत्त हो चुके और भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रोन्नति पा चुके अधिकारियों की जानकारी भी शामिल की गई है।

सूची में दर्ज जन्मतिथि, सेवा में योगदान की तिथि या किसी अन्य विवरण पर असहमति होने की स्थिति में संबंधित पदाधिकारी प्रमाणों के साथ अपना पक्ष रख सकते हैं। इसके लिए प्रकाशन की तारीख से आठ दिन का समय दिया गया है। आवेदन विभागीय सचिव को लिखित रूप में सौंपने की व्यवस्था की गई है।

अधिकारी विभाग द्वारा बताए गए ई-मेल माध्यम से भी अपना दावा या आपत्ति भेज सकते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि में मिलने वाले आवेदनों पर विचार करने के बाद ही अंतिम वरीयता सूची प्रकाशित की जाएगी। ऐसे में मौजूदा सूची को अंतिम सेवा-वरीयता निर्धारण नहीं माना जाएगा।

औपबंधिक सूची में झारखंड लोक सेवा आयोग की अनुशंसा पर नियुक्त अधिकारियों को शामिल नहीं किया गया है। विभागीय आदेश में यह अंतर स्पष्ट किया गया है, ताकि सूची के दायरे और उसमें सम्मिलित सेवा अधिकारियों को लेकर भ्रम की स्थिति न बने।

वरीयता सूची अधिकारियों की सेवा-स्थिति से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रशासनिक अभिलेख होती है। संशोधित सूची सार्वजनिक होने के बाद अब संबंधित पदाधिकारियों को अपने विवरण की जांच करनी होगी। प्रमाण सहित प्राप्त दावों और आपत्तियों के परीक्षण के बाद सरकार अंतिम सूची जारी करेगी।