गढ़वा में अर्नब की बारिश से तैयार धान पर खतरा, रबी की बुवाई के लिए बढ़ी मिट्टी की नमी

गढ़वा में लगातार बारिश से कटाई के लिए तैयार और खेतों में रखे धान को नुकसान की आशंका है। हालांकि, यही बारिश चना, मसूर, सरसों और मटर जैसी रबी फसलों की तैयारी में सहायक हो सकती है।

2 मिनट पढ़ें 5 बार पढ़ी गई
गढ़वा में बारिश के बीच खेत में तैयार धान की फसल

गढ़वा जिले में चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव से हो रही बारिश किसानों के लिए चिंता और राहत, दोनों लेकर आई है। कटाई के लिए तैयार धान की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ी है, जबकि बारिश से मिट्टी में लौटी नमी आगामी रबी फसलों की बुवाई के लिए उपयोगी मानी जा रही है। बुधवार शाम चार से पांच बजे के बीच शुरू हुई बारिश का असर जिले के लगभग सभी क्षेत्रों में बताया गया है।

सबसे अधिक चिंता उन किसानों को है, जिनका धान पककर कटाई के लिए तैयार है या काटने के बाद खेतों में रखा हुआ है। खेतों में पानी जमा रहने से धान की बालियों में अंकुरण की समस्या हो सकती है। तेज हवा चलने पर खड़ी फसल के गिरने और उत्पादन प्रभावित होने की भी आशंका जताई गई है। हालांकि, बारिश के साथ तेज आंधी जैसी स्थिति नहीं बनने की सूचना है।

गढ़वा के लिए मौसम संबंधी ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसी के मद्देनजर उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने जिले के सभी श्रेणी के सरकारी और निजी विद्यालयों को 29 अक्टूबर को पूरे दिन बंद रखने का निर्देश दिया। बारिश के कारण तापमान में गिरावट और ठंड बढ़ने की संभावना भी व्यक्त की गई है।

कृषि विज्ञान केंद्र, गढ़वा के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक और बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय के कृषि संकाय के डीन डॉ. अशोक कुमार के अनुसार, तूफान का मुख्य केंद्र झारखंड तक पहुंचने की संभावना नहीं है। इसके बाहरी बादलों, नमी और वायुमंडलीय परिसंचरण के प्रभाव से 28 से 30 अक्टूबर के बीच बारिश तथा गरज-चमक की स्थिति बनी रह सकती है। उन्होंने 29 अक्टूबर को अधिक बारिश की संभावना बताई है।

वहीं, बारिश रबी की खेती के लिए अनुकूल नमी उपलब्ध करा सकती है। जिन खेतों की मिट्टी सूखने लगी थी, वहां मौसम साफ होने के बाद जुताई करना आसान हो सकता है। किसान इसके बाद चना, मसूर, सरसों, मटर और दूसरी उपयुक्त रबी फसलों की बुवाई की तैयारी कर सकेंगे।

कृषि विशेषज्ञ ने किसानों को बारिश थमने और खेतों के जुताई योग्य होने तक इंतजार करने की सलाह दी है। फिलहाल प्राथमिक चुनौती तैयार धान को भीगने और खेतों में पानी जमा होने से बचाना है। मौसम साफ होने के बाद उपलब्ध नमी का उपयोग रबी की समयबद्ध बुवाई में किया जा सकता है।