गढ़वा जिले में सड़क दुर्घटनाओं और उनमें जान गंवाने वाले लोगों की संख्या में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में पेश आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अगस्त 2026 के बीच जिले में 166 हादसे हुए। इनमें 119 लोगों की मौत हुई और 138 लोग घायल हुए। बैठक गुरुवार को समाहरणालय में उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी पशुपति नाथ मिश्रा की अध्यक्षता में हुई।
मोटर व्हीकल निरीक्षक मनीष कुमार ने बैठक में 2025 और 2026 की समान आठ महीने की अवधि के तुलनात्मक आंकड़े रखे। पिछले वर्ष इस अवधि में 120 दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें 78 लोगों की जान गई और 80 लोग घायल हुए थे। इस आधार पर हादसों की संख्या में 38 प्रतिशत, मौतों में 53 प्रतिशत और घायलों में करीब 73 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
उपायुक्त ने सड़क संरचना में सुधार के साथ यातायात नियमों के पालन और लोगों के व्यवहार में बदलाव को जरूरी बताया। उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और आईटीआई में नियमित जागरूकता कार्यक्रम चलाने को कहा। हेलमेट और सीट बेल्ट के उपयोग, तेज रफ्तार पर नियंत्रण तथा प्रभावी वाहन जांच अभियान पर भी जोर दिया गया।
जिले के दुर्घटना संभावित स्थानों और ब्लैक स्पॉट की पहचान कर वहां मिरर, पर्याप्त रोशनी, रंबल स्ट्रिप, स्पीड ब्रेकर और रेडियम संकेतक लगाने के निर्देश दिए गए। स्कूलों के आसपास विशेष सुरक्षा व्यवस्था करने तथा आवश्यकता वाले स्थानों पर फुट ओवरब्रिज या अंडरपास बनाने की दिशा में कार्रवाई करने को भी कहा गया।
गढ़वा शहर में सड़क किनारे अतिक्रमण, अव्यवस्थित दुकानें, अधूरी नालियां, जलजमाव और मार्ग पर लगे बिजली व टेलीफोन के खंभों से जुड़ी समस्याओं की समीक्षा की गई। नगर परिषद को आवश्यक कार्रवाई, बेहतर जल निकासी और प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी लगाने का निर्देश मिला। एनएचएआई ने बताया कि एनएच-39 से जुड़ी सड़कों के ब्रेकरों पर रोड मार्किंग पूरी कर ली गई है और खजूरी से विंढमगंज तक अनधिकृत कट बंद किए गए हैं।
हादसों के बाद घायलों को समय पर उपचार दिलाने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त एंबुलेंस रखने तथा पीसीआर और सड़क किनारे स्थित थानों में प्राथमिक उपचार किट व जरूरी जीवनरक्षक दवाएं उपलब्ध कराने को कहा गया। पुलिसकर्मियों को प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण देने और स्कूली वाहनों में ओवरलोडिंग रोकने के लिए औचक जांच करने के निर्देश भी दिए गए।