गढ़वा में किसान-वैज्ञानिक संवाद, मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरक इस्तेमाल की सलाह

गढ़वा कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित संवाद कार्यक्रम में किसानों को फसल सुरक्षा, पोषक तत्व प्रबंधन, कीट नियंत्रण और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।

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गढ़वा के कृषि विज्ञान केंद्र के प्रशिक्षण भवन में शनिवार को किसान-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला कृषि कार्यालय से प्रायोजित यह आयोजन फसल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत हुआ। इसमें कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने किसानों को खेती से जुड़े तकनीकी उपायों तथा केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी।

कार्यक्रम का उद्घाटन जिला कृषि पदाधिकारी खुशबू पासवान ने किया। उन्होंने फसलों की सुरक्षा के साथ किसानों के लिए संचालित सरकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने किसानों से उपलब्ध योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने और सरकारी प्रयासों को सफल बनाने में भागीदारी करने का आग्रह किया।

कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान महेश चंद्र जेराई ने पोषक तत्व प्रबंधन पर जानकारी साझा की। उन्होंने फसलों को कीटों और व्याधियों से बचाने के उपाय भी बताए। संवाद में किसानों को उत्पादन के दौरान फसल की देखभाल से जुड़े तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया गया।

मृदा वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने संतुलित मात्रा में उर्वरकों के प्रयोग पर जोर दिया। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि कृषि कार्य शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच कराएं और मृदा स्वास्थ्य कार्ड हासिल करें। उनके अनुसार, जांच से प्राप्त जानकारी के अनुरूप ही खेतों में उर्वरकों का इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन नवलेश कुमार ने किया। इसमें पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. बंधनु उरांव, सहायक सियाराम पांडेय, कृष्ण कुमार चौबे और राकेश रंजन चौबे शामिल हुए। प्रगतिशील किसान शिवनाथ कुशवाहा, अमरेश ठाकुर, गीता देवी और मैना देवी समेत अन्य लोगों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।