गढ़वा में राशन वितरण की व्यवस्था में बार-बार गड़बड़ी सामने आने पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी पशुपति नाथ मिश्रा ने कहा है कि किसी स्थान पर तीसरी बार ऐसी घटना दोहराई गई तो संबंधित सहायक गोदाम प्रबंधक (एजीएम) और प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (बीएसओ) के खिलाफ संयुक्त रूप से प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
समाहरणालय सभागार में गुरुवार को हुई समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने केतार और मेराल में सामने आई घटनाओं का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि खाद्यान्न की व्यवस्था में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी स्वीकार नहीं की जाएगी। लापरवाही या अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात भी कही गई।
बैठक के दौरान राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) और झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना (जेएसएफएसएस) के तहत चल रहे कार्यों की प्रखंडवार समीक्षा की गई। राशन वितरण के साथ डोर स्टेप डिलीवरी और लाभुकों के ई-केवाईसी की प्रगति भी समीक्षा के प्रमुख विषयों में शामिल रही।
उपायुक्त ने सितंबर महीने में खाद्यान्न के उठाव, आपूर्ति और वितरण की स्थिति की जानकारी ली। इसके बाद अधिकारियों को अक्टूबर का खाद्यान्न उठाव और वितरण निर्धारित समय पर पूरा कराने का निर्देश दिया गया, ताकि पात्र लाभुकों तक सामग्री पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित न हो।
सितंबर में एनएफएसए और जेएसएफएसएस के अंतर्गत चना दाल तथा नमक के वितरण की पड़ताल में कुछ प्रखंडों में वितरण नहीं होने की जानकारी सामने आई। इस स्थिति पर उपायुक्त ने नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों से जवाब लेने को कहा।
जिला आपूर्ति पदाधिकारी देवानंद राम को उन प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया गया है, जिनके क्षेत्रों में दाल और नमक का वितरण नहीं हुआ। समीक्षा बैठक में प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया कि राशन प्रबंधन, समयबद्ध वितरण और अधिकारियों की जिम्मेदारी पर आगे भी निगरानी रखी जाएगी।