गढ़वा जिले में लेप्टोस्पायरोसिस के दो मरीजों की आधिकारिक पुष्टि हुई है। इनमें एक मामला बड़गड़ और दूसरा खरौंधी क्षेत्र का है। बड़गड़ में चार अन्य मरीज स्क्रब टाइफस से संक्रमित पाए गए हैं। इन मामलों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित और संबंधित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।
जिला महामारी विशेषज्ञ डॉ. संतोष कुमार मिश्रा के अनुसार, बड़गड़ के एक अन्य मरीज की निजी अस्पताल में रैपिड किट से जांच हुई है, लेकिन उसे अभी पुष्ट मामला नहीं माना गया है। उसका नमूना जांच के लिए रिम्स, रांची भेजा गया है। इस कारण जिले में फिलहाल लेप्टोस्पायरोसिस के आधिकारिक मामलों की संख्या दो ही है।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि लेप्टोस्पायरोसिस एक बैक्टीरियल बीमारी है। संक्रमित चूहों, कुत्तों, बकरियों, गायों, भैंसों या घोड़ों के मूत्र से दूषित पानी और मिट्टी के संपर्क में आने पर संक्रमण का खतरा रहता है। त्वचा की खरोंच तथा आंख, नाक या मुंह के रास्ते भी बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर सकता है। जलजमाव और कीचड़ के कारण वर्षा के मौसम में जोखिम बढ़ जाता है।
इसके लक्षणों में तेज बुखार, कंपकंपी, तीव्र सिरदर्द, पीठ के निचले हिस्से और घुटने के नीचे की मांसपेशियों में दर्द शामिल हैं। आंखों में लाली, त्वचा या आंखों का पीलापन, मितली, उल्टी और दस्त भी हो सकते हैं। विभाग के मुताबिक, इसके लक्षण दूसरी बीमारियों से मिलते-जुलते होने के कारण समय पर जांच जरूरी है।
बड़गड़ में मिले स्क्रब टाइफस के चार मामलों के बारे में जिला महामारी विशेषज्ञ ने बताया कि यह बीमारी संक्रमित चिग्गर माइट के काटने से फैलती है। काटने वाली जगह पर बीच में काला और किनारों पर लाल निशान दिखाई दे सकता है। इसके कई लक्षण लेप्टोस्पायरोसिस जैसे हो सकते हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने खेत या कीचड़ में काम करते समय गम बूट पहनने और खुले घावों को वाटरप्रूफ पट्टी से ढकने की सलाह दी है। जमा पानी से दूरी रखने तथा बीमार पशु की देखभाल करते समय दस्ताने, मास्क और आंखों की सुरक्षा का उपयोग करने को कहा गया है। लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच और इलाज कराने की अपील की गई है, जहां ये सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध बताई गई हैं।