रांची में पशुपालन विभाग ने राज्य के 2.08 करोड़ पशुओं का टीकाकरण पूरा करने का दावा किया है। इस अभियान में विभाग से प्रशिक्षित 1,500 पशु सखियों को लगाया गया। पहली बार पशु सखियों ने बकरी और भेड़ के साथ गाय तथा भैंस के टीकाकरण की जिम्मेदारी भी संभाली।
विभाग के अनुसार, अभियान में खुरपका-मुंहपका, ब्रूसेलोसिस और दूसरे संक्रामक रोगों से बचाव के लिए टीके लगाए गए। गाय-भैंस के टीकाकरण से पहले पशु सखियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। विभाग ने इस पूरे अभियान पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी है।
राज्य में टीकाकरण के लिए करीब 7,500 कर्मियों की आवश्यकता बताई गई है, जबकि अभी लगभग 3,000 पशु मित्र विभाग से जुड़े हैं। उपलब्ध मानव संसाधन और जरूरत के बीच अंतर को कम करने के लिए विभाग 1,500 अन्य पशु सखियों को प्रशिक्षण देकर अपने साथ जोड़ने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए विभागीय प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
टीकाकरण करने वाले पशु मित्रों और पशु सखियों के लिए प्रति पशु पांच रुपये भुगतान का प्रावधान रखा गया है। यह राशि तभी मिलेगी, जब संबंधित विवरण भारत पशुधन ऐप पर दर्ज किया जाएगा। पशुपालक के मोबाइल पर आए ओटीपी के बाद टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी करने और उसी स्थान से आंकड़े अपलोड करने की व्यवस्था है।
अभियान के दौरान मोबाइल नेटवर्क और ओटीपी से जुड़ी व्यावहारिक परेशानियां भी सामने आईं। कई गांवों में कमजोर नेटवर्क के कारण ऐप पर तत्काल जानकारी दर्ज करना कठिन रहा। कुछ पशुपालकों के ओटीपी साझा नहीं करने से भी काम प्रभावित हुआ। ऐप में तय दूरी की सीमा होने के कारण कर्मचारी गांव से बाहर जाकर संबंधित आंकड़े अपलोड नहीं कर सकते थे।
पशुपालन विभाग के निदेशक रोबिन टोप्पो के अनुसार, गाय और भैंस के टीकाकरण में पशु सखियों को पहली बार शामिल किया गया और इसके लिए विभाग ने उन्हें प्रशिक्षण दिलाया। अतिरिक्त पशु सखियों को तैयार करने की योजना लागू होने पर राज्य में भविष्य के टीकाकरण अभियानों के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता बढ़ सकेगी।