गढ़वा में 24.87 करोड़ का नया अस्पताल तैयार, पुराने भवन में जलजमाव से मरीज परेशान

गढ़वा सदर अस्पताल का 50 बेड वाला नया भवन तैयार है, लेकिन इलाज पुराने परिसर में जारी है। सिविल सर्जन के अनुसार स्थानांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

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गढ़वा सदर अस्पताल के नए भवन और पुराने परिसर की व्यवस्था से जुड़ी खबर

गढ़वा सदर अस्पताल के लिए 24.87 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया 50 बेड का नया भवन तैयार होने के बावजूद मरीजों का इलाज पुराने भवन में ही चल रहा है। बारिश के दौरान पुराने परिसर में जलजमाव होने से मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नए भवन में अस्पताल के स्थानांतरण की समयसीमा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

31 अगस्त को हुई बारिश के बाद पुराने सदर अस्पताल परिसर में पानी भर गया था। कुपोषण उपचार केंद्र तक पानी पहुंचने के कारण वहां भर्ती बच्चों को दूसरी जगह स्थानांतरित करना पड़ा। बरसात में परिसर के जलमग्न होने की समस्या पहले भी सामने आती रही है, लेकिन इसका स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है।

मौजूदा स्थिति में एक ओर नया अस्पताल भवन उपयोग शुरू होने की प्रतीक्षा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पुराने परिसर की व्यवस्था मरीजों की मुश्किल बढ़ा रही है। भवन निर्माण पर बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी स्वास्थ्य सेवाएं वहां शुरू नहीं होने से स्थानीय मरीजों और ग्रामीणों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नए भवन और प्रस्तावित सुविधाओं का महत्व तभी है, जब उनका वास्तविक लाभ मरीजों तक पहुंचे। उन्होंने बारिश के दौरान पुराने अस्पताल में होने वाले जलजमाव से राहत के लिए स्थायी व्यवस्था की जरूरत भी बताई है। नए परिसर में स्थानांतरण में हो रही देरी के पीछे तकनीकी या प्रशासनिक अड़चन को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की प्रतीक्षा है।

सिविल सर्जन डॉ. जान एफ. केनेडी के अनुसार, अस्पताल को नए भवन में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने बताया कि बिजली व्यवस्था से जुड़े काम के लिए संवेदक को साढ़े सात लाख रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। यह काम स्थानांतरण से पहले पूरी की जाने वाली प्रक्रियाओं का हिस्सा है।

सिविल सर्जन ने उम्मीद जताई है कि एक सप्ताह के भीतर सभी प्रक्रियाएं पूरी कर अस्पताल को नए भवन में स्थानांतरित किया जा सकेगा। फिलहाल मरीजों को पुराने भवन में ही उपचार लेना पड़ रहा है। स्थानांतरण पूरा होने तक पुराने परिसर में जलजमाव से मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता प्रमुख चिंता बनी हुई है।