हजारीबाग जिले के कटकमसांडी प्रखंड की ढौठवा पंचायत स्थित कारी चट्टान टोला में पेयजल का संकट सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार, टोले में बनाई गई तीनों जलमीनार कई महीनों से खराब हैं। उनका कहना है कि नियमित आपूर्ति बंद होने के बाद मुसहर समाज के परिवारों को पीने के पानी के लिए एक गड्ढे पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि जल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से जलमीनारों का निर्माण कराया गया था। उनके मुताबिक, नल-जल योजना से करीब एक महीने तक पानी मिला, लेकिन इसके बाद तीनों संरचनाओं से आपूर्ति बंद हो गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि समस्या की सूचना पंचायत प्रतिनिधियों को कई बार देने के बावजूद मरम्मत नहीं कराई गई।
टोले के लोगों ने जलमीनारों के कुछ उपकरण खुलवाकर कहीं भेजे जाने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उपकरण वापस नहीं आने के कारण मरम्मत का काम आगे नहीं बढ़ सका। हालांकि, इस आरोप पर संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों का पक्ष रिपोर्ट तैयार होने तक उपलब्ध नहीं था।
ग्रामीणों का दावा है कि गड्ढे का पानी पीने से बच्चों की सेहत प्रभावित हो रही है और वे बार-बार बीमार पड़ रहे हैं। इस दावे की किसी चिकित्सकीय जांच या स्वतंत्र पुष्टि का विवरण उपलब्ध नहीं है। लोगों ने सुरक्षित पेयजल की तत्काल व्यवस्था करने के साथ खराब जलमीनारों को चालू कराने की मांग रखी है।
ग्रामीणों ने पंचायत क्षेत्र में सड़क, नाली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने विकास कार्यों के लिए मिली राशि के उपयोग की जांच कराने की मांग की। ढौठवा पंचायत के पूर्व मुखिया राजकुमार यादव ने भी जलमीनारों की शीघ्र मरम्मत और टोले के परिवारों तक स्वच्छ पानी पहुंचाने की जरूरत बताई।
कटकमसांडी की प्रखंड विकास पदाधिकारी पूजा कुमारी ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है और इसकी जानकारी लेने के लिए मुखिया को बुलाया जाएगा। उन्होंने पेयजल की समस्या को संवेदनशील बताया। अब ग्रामीणों की निगाह प्रशासन की जांच, वैकल्पिक जलापूर्ति और बंद पड़ी जलमीनारों की मरम्मत पर है।