देवघर में रुक-रुककर हो रही बारिश के बीच मच्छरजनित और दूसरी बरसाती बीमारियों की आशंका को देखते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग ने रोकथाम और निगरानी तेज कर दी है। विभाग ने वेक्टर बोर्न डिजीज इकाई को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सदर अस्पताल में ऐसे मरीजों के लिए विशेष वार्ड भी तैयार किया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें भर्ती करने में परेशानी न हो।
विभाग के अध्यक्ष डॉ. अभय यादव के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में करीब 1500 घरों में एंटी लार्वा का छिड़काव किया गया है। अभियान के दौरान जिन घरों में बारिश का पानी जमा मिला, वहां पानी की निकासी और साफ-सफाई कराई गई। स्वास्थ्य विभाग के वॉलंटियर्स को अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है।
जांच अभियान में करीब 550 घरों में पुराने टैंकर, कूलर, टायर और अन्य सामान में जमा पानी हटाया गया। इन स्थानों पर मिले मच्छरों के लार्वा को भी नष्ट किया गया। विभाग का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के प्रसार की आशंका को कम करना है।
बारिश के दौरान जगह-जगह जलजमाव होने से मच्छरों के पनपने का खतरा बढ़ता है। वहीं, भीगने के कारण बच्चों और बुजुर्गों में सर्दी, खांसी और जुकाम जैसी परेशानियां भी सामने आ रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए फील्ड स्तर की गतिविधियों के साथ अस्पताल की तैयारियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया ने देवघर सदर अस्पताल का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल में क्रिटिकल केयर सुविधा जल्द शुरू करने का निर्देश दिया, जिससे डेंगू, मलेरिया तथा दूसरी गंभीर बरसाती बीमारियों से प्रभावित मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के सामने कर्मचारियों और जांच संसाधनों की कमी चुनौती बनी हुई है। डेंगू, मलेरिया और कालाजार की जांच के लिए सदर अस्पताल को एम्स की सहायता लेनी पड़ रही है। अधिकारियों के मुताबिक, राज्य सरकार की ओर से वेक्टर जनित बीमारियों की जांच से जुड़ी किट जल्द उपलब्ध कराई जाएगी। विभाग ने इस बीच निगरानी और रोकथाम अभियान जारी रखने की बात कही है।