गम्हरिया में कृषि विद्यार्थियों का एक माह का ग्रामीण कार्य-अनुभव कार्यक्रम शुरू

सरायकेला-खरसावां के गांवों में 10 कृषि विद्यार्थी खेत भ्रमण, संसाधन मानचित्रण और समूह चर्चा के जरिए किसानों की समस्याओं तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समझेंगे।

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सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में बीएससी ऑनर्स कृषि के विद्यार्थियों के लिए एक माह के ग्रामीण कृषि कार्य-अनुभव कार्यक्रम की शुरुआत हुई है। कार्यक्रम में शामिल 10 विद्यार्थी ग्रामीण परिवेश में रहकर अपने सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ेंगे।

वरीय वैज्ञानिक डॉ. पंकज सेठ ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया और विद्यार्थियों को इसके उद्देश्यों की जानकारी दी। प्रशिक्षण का केंद्र किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझना तथा कृषि से जुड़े तकनीकी ज्ञान को गांवों की परिस्थितियों में लागू करने की प्रक्रिया सीखना है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थी सरायकेला-खरसावां के गांवों का दौरा करेंगे। वहां उन्हें पार्टिसिपेटरी रूरल अप्रेजल यानी पीआरए की विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक अभ्यास कराया जाएगा। इससे वे ग्रामीण संसाधनों, खेती के स्वरूप और स्थानीय जरूरतों का व्यवस्थित आकलन करना सीखेंगे।

प्रशिक्षण में संसाधन मानचित्र तैयार करना, खेतों का भ्रमण करना, मौसमी कैलेंडर बनाना, समस्याओं की प्राथमिकता निर्धारित करना और समूह चर्चा आयोजित करना शामिल है। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थी गांव तथा कृषि व्यवस्था को किसानों के अनुभवों के आधार पर समझने का प्रयास करेंगे।

कार्यक्रम में डॉ. अमरेश चंद्र पांडे, गोन्दरा मार्डी, एलिसामी बारवा और डॉ. लीली मैक्सिमा किस्पोट्टा ने भी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने किसानों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करने और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की जानकारी गांवों तक पहुंचाने पर जोर दिया।

इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों के तकनीकी ज्ञान के साथ उनके संवाद कौशल को भी विकसित करना है। ग्रामीण स्तर पर प्रत्यक्ष अनुभव मिलने से उन्हें किसानों की समस्याओं की पहचान करने और उनके लिए वैज्ञानिक समाधान तलाशने की कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिलेगा।