झारखंड के छह सरकारी विश्वविद्यालयों में प्रतिकुलपति के पद करीब चार साल से खाली हैं। इनमें रांची विश्वविद्यालय, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, कोल्हान विश्वविद्यालय, नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय, सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय और बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय शामिल हैं। पद रिक्त रहने से स्नातक स्तर की डिग्रियों पर हस्ताक्षर करने से लेकर कई शैक्षणिक और प्रशासनिक निर्णय लेने तक की जिम्मेदारी कुलपतियों पर आ गई है।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, इन विश्वविद्यालयों में हर वर्ष स्नातक की लगभग 15 हजार से 30 हजार डिग्रियां जारी होती हैं। प्रतिकुलपति नहीं होने के कारण इन पर भी कुलपति को हस्ताक्षर करना पड़ रहा है, जबकि स्नातकोत्तर स्तर की हजारों डिग्रियों पर हस्ताक्षर की जिम्मेदारी पहले से उनके पास है। स्नातक स्तर से जुड़े निर्णय भी सीधे कुलपति तक पहुंच रहे हैं।
प्रतिकुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया के लिए करीब चार साल पहले आवेदन मांगे गए थे, लेकिन नियुक्तियां नहीं हो सकीं। आवेदन की वर्तमान स्थिति के संबंध में भी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। कुलपति की अनुपस्थिति में सामान्यतः प्रतिकुलपति कार्यभार संभालते हैं, मगर पद खाली होने पर यह दायित्व किसी वरिष्ठ डीन को देना पड़ता है।
रांची विश्वविद्यालय में डिग्री प्रमाणपत्रों की लंबित संख्या भी बड़ी रही है। विवरण के मुताबिक, एक समय करीब एक लाख डिग्रियां वर्षों से लंबित थीं। विशेष शुल्क के साथ आवेदन करने वालों के प्रमाणपत्रों पर कुलपति हस्ताक्षर कर रहे थे, फिर भी करीब 80 हजार डिग्रियां बाकी रह गईं। बाद में छात्रहित में प्रमाणपत्रों पर कुलपति के फेसिमाइल हस्ताक्षर की मुहर लगाने का निर्णय लिया गया और परीक्षा विभाग ने इन्हें कॉलेजों में भेजना शुरू किया।
विश्वविद्यालय व्यवस्था में प्रतिकुलपति की भूमिका परीक्षा, एकेडमिक काउंसिल, सिंडिकेट, वित्तीय मामलों, विभागों और कॉलेजों के बीच समन्वय तथा खेल गतिविधियों तक फैली है। नए विश्वविद्यालय अधिनियम में प्रतिकुलपति को 61 बोर्डों में स्थान दिया गया है। उन्हें सिंडिकेट का उपाध्यक्ष और परीक्षा एवं मूल्यांकन बोर्ड समेत कई निकायों का अध्यक्ष बनाए जाने का प्रावधान है।
नए अधिनियम में नियमित नियुक्ति होने तक किसी योग्य व्यक्ति को प्रतिकुलपति का अस्थायी प्रभार देने की व्यवस्था भी की गई है। इसके तहत राज्यपाल, मुख्यमंत्री के परामर्श से अस्थायी नियुक्ति कर सकते हैं। नियमित प्रतिकुलपति की नियुक्ति सर्च कमेटी की अनुशंसा के आधार पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री संयुक्त रूप से करेंगे।