गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर रांची में स्वास्थ्य कर्मियों ने ली तंबाकू से दूर रहने की शपथ

रांची सिविल सर्जन कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों ने तंबाकू सेवन नहीं करने तथा उसके दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करने का संकल्प लिया।

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रांची सिविल सर्जन कार्यालय में तंबाकू सेवन नहीं करने की शपथ लेते स्वास्थ्य कर्मी

रांची में महात्मा गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर तंबाकू और नशे के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। सिविल सर्जन कार्यालय के सभागार में हुए कार्यक्रम के दौरान वहां कार्यरत पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने तंबाकू का सेवन नहीं करने की शपथ ली। उन्होंने इसके स्वास्थ्य संबंधी नुकसान के बारे में जागरूक रहने और समाज तक बचाव का संदेश पहुंचाने का भी संकल्प लिया।

कार्यक्रम में जिला नोडल पदाधिकारी सह जिला कुष्ठ निवारण पदाधिकारी डॉ. सीमा गुप्ता, डीआरसीएचओ डॉ. असीम माझी, डॉ. तवा रिजीवी, डॉ. राजीव भूषण और परामर्शी सुशांत कुमार सहित अन्य अधिकारी एवं स्वास्थ्य कर्मी शामिल हुए। आयोजन का उद्देश्य कार्यालय के कर्मचारियों के माध्यम से तंबाकू मुक्त समाज के निर्माण का संदेश आगे बढ़ाना था।

कार्यक्रम में साझा की गई जानकारी के अनुसार, भारत में तंबाकू सेवन के कारण प्रत्येक वर्ष 13 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु होती है। झारखंड की लगभग 38.9 प्रतिशत आबादी किसी न किसी रूप में तंबाकू का उपयोग करती है। इन आंकड़ों को चिंता का विषय बताते हुए तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति व्यापक जन-जागरूकता की जरूरत पर जोर दिया गया।

अधिकारियों और कर्मचारियों को बताया गया कि तंबाकू से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी नुकसान से बचाव के लिए लोगों को इसके सेवन से दूर रहने के लिए प्रेरित करना आवश्यक है। शपथ कार्यक्रम के माध्यम से स्वास्थ्य कर्मियों ने स्वयं नशे से दूरी बनाए रखने के साथ ही दूसरे लोगों तक भी जागरूकता का संदेश पहुंचाने की जिम्मेदारी स्वीकार की।

डॉ. सीमा गुप्ता ने कहा कि महात्मा गांधी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि लोग स्वयं नशे से दूर रहें और समाज के अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें। उन्होंने नशे को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताते हुए कहा कि इससे समाज में भी कई तरह की कुरीतियां पैदा होती हैं।

स्वास्थ्य कर्मियों के इस सामूहिक संकल्प को समाज के लिए प्रेरक पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में तंबाकू के नुकसान से बचाव, व्यक्तिगत जिम्मेदारी और समुदाय के बीच जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित रहा। इसके साथ ही गांधी जयंती के अवसर को नशामुक्त जीवन का संदेश प्रसारित करने से जोड़ा गया।