धनबाद जिले में जापानी इंसेफेलाइटिस के दो मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और टीकाकरण की तैयारियां तेज कर दी हैं। विभाग के अनुसार, संक्रमित मिले दोनों बच्चों को जापानी इंसेफेलाइटिस का टीका नहीं लगा था। इनमें बाघमारा प्रखंड के एक बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि दूसरे बच्चे का एसएनएमएमसीएच में उपचार चल रहा है और उसकी स्थिति स्थिर बताई गई है।
मामलों की पुष्टि के बाद प्रभावित इलाकों में सर्वे शुरू किया गया है। सहिया के माध्यम से यह जानकारी जुटाई जा रही है कि कितने बच्चे नियमित टीकाकरण से बाहर रह गए हैं और कितने बच्चों को जापानी इंसेफेलाइटिस से बचाव वाला टीका नहीं मिल सका। विभाग ने जांच को केवल प्रभावित क्षेत्र तक सीमित नहीं रखते हुए पूरे जिले की टीकाकरण स्थिति की समीक्षा करने का निर्णय लिया है।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, सर्वे पूरा होने के बाद टीकाकरण से छूटे बच्चों को वैक्सीन दी जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर विशेष अभियान या विशेष टीकाकरण शिविर भी लगाए जा सकते हैं। सिविल सर्जन आलोक विश्वकर्मा ने जापानी इंसेफेलाइटिस के एक मामले को भी विभाग के लिए गंभीर संकेत बताया है।
विभाग ने बताया है कि जापानी इंसेफेलाइटिस का टीका बच्चों को नौ महीने और 16 महीने की उम्र में लगाया जाता है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर नियमित टीकाकरण के तहत टीके नि:शुल्क उपलब्ध हैं। अभिभावकों से बच्चों का टीकाकरण निर्धारित समय पर पूरा कराने की अपील की गई है।
प्रभावित इलाके के निरीक्षण के दौरान कुछ घरों के आसपास सूअर और बत्तख पाले जाने की जानकारी भी सामने आई। स्वास्थ्य अधिकारियों ने पशुओं के शेड को घर से कुछ दूरी पर रखने तथा आसपास नियमित साफ-सफाई बनाए रखने पर जोर दिया है।
विभाग के अनुसार, जापानी इंसेफेलाइटिस का संक्रमण मच्छरों के माध्यम से फैलता है। इसी कारण प्रभावित क्षेत्रों में मच्छरों के पनपने वाले स्थानों को खत्म करने, स्वच्छता बनाए रखने और लोगों को बीमारी के लक्षणों व बचाव के उपायों के बारे में जागरूक करने का काम भी किया जा रहा है। अब सर्वे के निष्कर्ष के आधार पर टीकाकरण अभियान की आगे की रूपरेखा तय होगी।