गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड स्थित अंबाडीह में तांबे की मौजूदगी के शुरुआती संकेत मिले हैं। झारखंड सरकार के भूतत्व सर्वेक्षण के प्रारंभिक नतीजों में इसकी पुष्टि होने के बाद क्षेत्र में खनिज अन्वेषण को अधिक व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी किसी व्यावसायिक खनन परियोजना की घोषणा नहीं, बल्कि भूगर्भीय खोज की प्रगति से जुड़ी है।
अंबाडीह में तांबे की खोज का काम वर्ष 2023 में शुरू हुआ था। क्षेत्र से लिए गए पत्थरों के नमूने जांच के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की कोलकाता प्रयोगशाला भेजे गए। जांच में नमूनों के भीतर तांबे के साथ सीसा और जिंक की मौजूदगी भी सामने आई। इसके बाद राज्य के भूतत्व निदेशालय ने अन्वेषण की गतिविधियां तेज कीं।
जांच के अगले चरण में लगभग आधा किलोमीटर क्षेत्र का स्थलाकृतिक सर्वेक्षण किया गया। तीन स्थानों पर जमीन में 200 मीटर गहराई तक छेदन कर अयस्क के नमूने निकाले गए। इन नमूनों में भी तांबे के अलावा अन्य खनिज मिलने की जानकारी दी गई है। हालांकि उपलब्ध विवरण में भंडार की मात्रा, अयस्क की औसत गुणवत्ता या खनन की व्यावहारिकता का अंतिम आकलन नहीं दिया गया है।
गिरिडीह जिले में इससे पहले डुमरी के बरगुंडा क्षेत्र में भी तांबे की खोज की जा चुकी है। वहां करीब एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में हुए सर्वेक्षण की विवरणी सरकार को सौंपी गई है। अंबाडीह में चल रहा काम जिले में ताम्र अयस्क की संभावनाओं को समझने की इसी व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा है।
भूतत्व निदेशालय के अनुसार, अंबाडीह के परिणाम उत्साहजनक हैं और अब सर्वेक्षण का दायरा बढ़ाया जाएगा। विस्तृत अन्वेषण से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भूमिगत खनिज किस विस्तार और गुणवत्ता में उपलब्ध हैं तथा वहां विधिवत खनन की संभावना कितनी व्यावहारिक है।
झारखंड में फिलहाल पूर्वी सिंहभूम के मुसाबनी क्षेत्र में केंद्र सरकार के उपक्रम हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड द्वारा तांबे का खनन किया जाता है। तांबा इलेक्ट्रिक वाहनों, डेटा सेंटरों और तकनीकी आधारभूत संरचना में उपयोग होने वाला महत्वपूर्ण खनिज है। ऐसे में गिरिडीह में आगे होने वाले सर्वेक्षण के निष्कर्ष राज्य के खनिज क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।