जमशेदपुर में मुंबई-हावड़ा गीतांजलि एक्सप्रेस से एक यात्री का शव टाटानगर स्टेशन पर उतारा गया। यात्री कैंसर का इलाज कराने के बाद अपने परिवार के साथ मुंबई से हावड़ा लौट रहे थे। यात्रा के दौरान उनकी मौत हो गई, लेकिन करीब 12 घंटे तक शव ट्रेन में ही रहने का आरोप है। घटना 24 अक्टूबर की बताई गई है।
मृत यात्री की पहचान पश्चिम बंगाल के भाटपारा निवासी विनोद पासवान के रूप में हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह गीतांजलि एक्सप्रेस की ट्रेन संख्या 12859 में सफर कर रहे थे। उनकी मौत के बाद साथ मौजूद परिजनों ने शव को चादर से ढक दिया।
ट्रेन के अन्य यात्रियों को घटना की जानकारी मिलने पर उन्होंने टीटीई को सूचित किया। यात्रियों का आरोप है कि उन्होंने चिकित्सा सहायता बुलाने और शव को ट्रेन से उतारने की मांग की, लेकिन कई घंटे तक कार्रवाई नहीं हुई। उनके मुताबिक, यात्री की मौत सुबह करीब आठ बजे हुई थी और रात आठ बजे तक शव को नहीं उतारा गया।
इस दौरान गीतांजलि एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से लगभग 12 घंटे विलंब से चल रही थी। ट्रेन रास्ते में कई बड़े स्टेशनों से गुजरी। यात्रियों का कहना है कि उनकी ओर से बार-बार सहायता मांगे जाने के बावजूद स्थिति का समय पर समाधान नहीं हुआ। बाद में एक यात्री ने रेल मंत्री को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया पर मामले की जानकारी साझा की।
चक्रधरपुर मंडल को शाम सात बजे के बाद सूचना मिलने की बात सामने आई है। इसके बाद मार्ग के संबंधित स्टेशनों को सतर्क किया गया। ट्रेन के टाटानगर पहुंचने पर जीआरपी और आरपीएफ की टीमों ने शव को कोच से बाहर निकाला तथा यात्री के चिकित्सा दस्तावेजों की जांच की।
टाटानगर आरपीएफ पोस्ट के प्रभारी के अनुसार, घटना किसी दूसरे रेल मंडल में हुई थी और चक्रधरपुर मंडल को शाम में इसकी जानकारी मिली। जरूरी प्रक्रिया के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। मृतक के बेटे राहुल पासवान ने टाटानगर जीआरपी को लिखित सूचना दी कि परिवार शव को निजी एंबुलेंस से लेकर जाएगा।