गुमला जिले में कृषि विविधीकरण और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर तैयार करने के उद्देश्य से चाय की खेती की पहल शुरू की गई है। उद्यान विभाग बिशुनपुर प्रखंड के नर्मा स्थित कृषि प्रक्षेत्र में इसकी शुरुआत कर रहा है। योजना के पहले चरण में यहां कुल 80 हजार चाय के पौधे लगाए जाने हैं और पौधरोपण का काम जारी है।
उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन ने शनिवार को नर्मा कृषि प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने पौधरोपण की प्रगति देखने के साथ खेती के लिए उपलब्ध कराई गई आधारभूत सुविधाओं का भी जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान जिला उद्यान पदाधिकारी डॉ. तमन्ना और तकनीकी विशेषज्ञ विश्व दीपक सिंह सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
चाय के पौधों की देखभाल और खेती के व्यवस्थित संचालन के लिए प्रक्षेत्र में पैक हाउस, माली शेड तथा वाटर टैंक की व्यवस्था की गई है। पौधों की सुरक्षा के लिए फेंसिंग और सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर भी लगाए गए हैं। विभाग के अनुसार, इन सुविधाओं से नियमित सिंचाई और पौधों के रखरखाव में सहूलियत मिलेगी।
निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त ने कहा कि यह पहल जिले में कृषि की नई संभावनाएं विकसित कर सकती है। इसके जरिए परंपरागत खेती के साथ दूसरी फसलों की ओर बढ़ने का रास्ता खुलेगा। प्रशासन को उम्मीद है कि चाय की खेती आगे चलकर स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर तैयार करने में सहायक होगी।
जिला उद्यान पदाधिकारी के अनुसार, नर्मा में चाय की खेती सफल रहने पर ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। इससे किसानों के लिए आय के नए स्रोत विकसित होने की संभावना भी बनेगी। फिलहाल परियोजना का ध्यान कृषि प्रक्षेत्र में पौधे लगाने और उनके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं मजबूत करने पर है।
जिला प्रशासन और उद्यान विभाग ने स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए कृषि आधारित विकास को गति देने का लक्ष्य रखा है। नर्मा प्रक्षेत्र में चल रहा पौधरोपण इस दिशा में शुरुआती कदम है। खेती की सफलता पौधों के विकास और उत्पादन के परिणाम सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।