गुमला के बीएसएफ जवान प्रबोध तिर्की को पैतृक गांव में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

डुमरी प्रखंड के काशी पकरीटोली निवासी बीएसएफ जवान प्रबोध तिर्की की त्रिपुरा में ड्यूटी के दौरान घायल होने के बाद इलाज के क्रम में मौत हो गई थी।

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गुमला निवासी बीएसएफ जवान प्रबोध तिर्की की फाइल तस्वीर

गुमला जिले के डुमरी प्रखंड स्थित काशी पकरीटोली गांव में रविवार को बीएसएफ जवान प्रबोध तिर्की का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचने पर परिवार के सदस्यों, ग्रामीणों और परिचितों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। गांव में बड़ी संख्या में लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए।

प्रकाशित विवरण के अनुसार, 43 वर्षीय प्रबोध तिर्की बीएसएफ की 42वीं वाहिनी में तैनात थे। उनकी ड्यूटी त्रिपुरा के मीनू बॉर्डर पर थी। ड्यूटी के दौरान हुए हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में उपचार के क्रम में 23 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई।

बीएसएफ के इंस्पेक्टर सिनु राम ईचागुटू से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, 21 अक्टूबर की रात करीब आठ बजे प्रबोध तिर्की सीमा पर तैनात थे। इसी दौरान डकैतों ने उन पर हमला किया। विवरण में कहा गया है कि उन्होंने हमलावरों का मुकाबला किया, लेकिन संघर्ष के दौरान गंभीर चोटें आईं। साथी जवानों ने उन्हें इलाज के लिए अगरतला के एलियस अस्पताल में भर्ती कराया था।

रविवार को पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही शोक का माहौल बन गया। अंतिम संस्कार के दौरान बीएसएफ जवानों ने निर्धारित सैन्य सम्मान के साथ उन्हें विदाई दी। परिजन और ग्रामीण इस मौके पर मौजूद रहे। स्थानीय लोगों ने उनकी सेवा को याद करते हुए परिवार के प्रति संवेदना जताई।

प्रबोध तिर्की वर्ष 2007 से सीमा सुरक्षा बल में सेवा दे रहे थे। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा हैं। ड्यूटी के दौरान घायल होने और फिर उनकी मृत्यु की सूचना से काशी पकरीटोली तथा आसपास के क्षेत्र में शोक है। ग्रामीणों ने कहा कि देश की सुरक्षा में दी गई उनकी सेवा और बलिदान को याद रखा जाएगा।