गुमला जिले के कई प्रखंडों में टूटे और क्षतिग्रस्त पुल-पुलियां बारिश के दौरान ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा रही हैं। सिसई, बिशुनपुर, रायडीह और पालकोट के दर्जनों गांव प्रभावित हैं। नदियों और नालों में पानी बढ़ने पर कुछ इलाकों का संपर्क सीमित हो जाता है, जबकि कई लोग मजबूरी में जर्जर ढांचों से होकर गुजरते हैं।
सिसई प्रखंड में डड़हा से छारदा जाने वाले मार्ग पर जैरा के पास कंस नदी का पुल करीब दो वर्ष पहले ध्वस्त हो गया था। इसका निर्माण वर्ष 2007-08 में लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से हुआ था। यह मार्ग डड़हा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग के जरिए लोहरदगा जिले से जुड़ता है। पुल नहीं रहने से जैरा, करकरी, बघनी, बुड़का, छारदा और आसपास के गांवों के लोगों को लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है।
बिशुनपुर प्रखंड के कुमारी गांव में महादेव टोंगरी के पास बनी पुलिया करीब एक साल से क्षतिग्रस्त है। इससे कुमारी के लगभग 80 और गोताख गांव के करीब 50 परिवार प्रभावित बताए गए हैं। ग्रामीण लकड़ी के सहारे पुलिया पार कर रहे हैं। बारिश में नीचे पानी का बहाव तेज होने से दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से इसके पुनर्निर्माण की मांग की है।
रायडीह प्रखंड में शंख नदी पर बने मरियम टोली पुल का एक पिलर वर्ष 2017 में बाढ़ और तेज जल प्रवाह के कारण धंस गया था। प्रशासन ने पुल के दोनों ओर आवागमन नहीं करने की चेतावनी वाले बोर्ड लगाए हैं। इसके बाद भी करीब 50 गांवों के लिए यह प्रमुख रास्ता होने के कारण लोग इसका उपयोग कर रहे हैं। पुल का निर्माण लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से कराया गया था।
पालकोट में पहान टोली के पास छोटका बाघलता का टूटा पुल भी स्थानीय लोगों और विद्यार्थियों के लिए समस्या बना हुआ है। पाकर टोली, कुरा, चोरडाड़, पानीसानी, कुल्लूकेरा और अन्य गांवों के निवासी इसी मार्ग से आते-जाते हैं। आसपास के कई विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं भी प्रतिदिन इस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं।
प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में इन रास्तों पर जोखिम और बढ़ जाता है। उन्होंने क्षतिग्रस्त पुलों की शीघ्र मरम्मत या पुनर्निर्माण की मांग की है। अलग-अलग स्थानों पर लंबे समय से समस्या बने रहने के कारण सुरक्षित संपर्क मार्ग उपलब्ध कराना ग्रामीणों की प्रमुख अपेक्षा है।