दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड की धानभाषा पंचायत स्थित चापुड़िया पहाड़िया टोला में पेयजल की परेशानी बनी हुई है। आदिम जनजाति समुदाय के लिए लगाई गई सोलर जलमीनार करीब एक साल से बंद है। जलापूर्ति रुकने के बाद टोले के परिवारों को पीने के पानी के लिए चापानल पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
यह जलमीनार गांव के स्कूल टोला में कल्याण विभाग की सीसीडी योजना के तहत लगाई गई थी। उपलब्ध जानकारी में इसका योजना क्रमांक 6/18-19 बताया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, व्यवस्था चालू रहने के दौरान पानी जुटाना आसान था, लेकिन लंबे समय से खराब पड़े होने के कारण परेशानी बढ़ गई है।
स्कूल टोला में आदिम जनजाति समुदाय के करीब 25 घर हैं। इसी क्षेत्र में एक आंगनबाड़ी केंद्र और एक प्राथमिक विद्यालय भी संचालित होता है। ऐसे में जलमीनार बंद रहने का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है; स्थानीय बच्चों और इन संस्थानों से जुड़े लोगों को भी उपलब्ध जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है।
चापुड़िया पहाड़िया टोला से सटे दूसरे टोले में करीब 15 पहाड़िया परिवार रहते हैं। वहां सोलर आधारित पेयजल व्यवस्था लगाने का काम शुरू किया गया था। इसके लिए डीप बोरिंग कराई गई और जलमीनार के कंक्रीट पिलर बनाने का काम भी आरंभ हुआ, लेकिन योजना पूरी नहीं हो सकी।
दूसरे टोले में जलापूर्ति की व्यवस्था अधूरी रहने के कारण परिवार कुएं के पानी का सहारा ले रहे हैं। इस तरह एक स्थान पर पहले से बनी जलमीनार खराब है, जबकि पास की नई योजना निर्माण के बीच में रुकी हुई है। दोनों स्थितियों के कारण नियमित पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
ग्रामीणों ने बंद जलमीनार की शीघ्र मरम्मत कर जलापूर्ति बहाल करने और अधूरी योजना का काम पूरा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि दोनों टोलों में व्यवस्था चालू होने से परिवारों को नियमित पेयजल मिल सकेगा और चापानल तथा कुएं पर मौजूदा निर्भरता कम होगी।