गुमला में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का निबंधन अनिवार्य, कारोबार के आधार पर लगेगा पेशेवर कर

नर्सिंग होम, निजी क्लीनिक, बार और रेस्टोरेंट समेत पात्र प्रतिष्ठानों की सूची जुटाई जाएगी। पांच लाख रुपये तक के वार्षिक कारोबार पर कर नहीं लगेगा।

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गुमला में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के निबंधन और पेशेवर कर से संबंधित प्रतिनिधि दृश्य

गुमला जिले में संचालित नर्सिंग होम, निजी क्लीनिक, बार, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए निबंधन अनिवार्य किया गया है। यह प्रक्रिया झारखंड वृत्ति, व्यापार, आजीविका और नियोजन कर अधिनियम, 2011 के प्रावधानों के तहत आगे बढ़ाई जा रही है। कर की देनदारी प्रतिष्ठान के वार्षिक सकल कारोबार और अधिनियम में निर्धारित शर्तों के आधार पर तय होगी।

राज्य कर संयुक्त आयुक्त संजय कुमार ने सिविल सर्जन और उत्पाद अधीक्षक को पत्र भेजकर उनके विभागों के अंतर्गत आने वाले संबंधित प्रतिष्ठानों की सूची मांगी है। सूची के आधार पर कर के दायरे में आने वाले संस्थानों की पहचान की जाएगी और उनके निबंधन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

वाणिज्य कर विभाग द्वारा तय व्यवस्था के अनुसार, सालाना पांच लाख रुपये तक कारोबार करने वाले प्रतिष्ठानों पर पेशेवर कर नहीं लगेगा। पांच लाख रुपये से अधिक और दस लाख रुपये तक के कारोबार पर एक हजार रुपये वार्षिक कर निर्धारित किया गया है।

दस लाख रुपये से अधिक और 25 लाख रुपये तक के वार्षिक कारोबार वाले प्रतिष्ठानों को 1,500 रुपये देने होंगे। 25 लाख रुपये से अधिक और 40 लाख रुपये तक के कारोबार पर दो हजार रुपये तथा 40 लाख रुपये से अधिक के कारोबार पर सालाना 2,500 रुपये कर देय होगा। ये श्रेणियां जीएसटी में पंजीकृत और गैर-पंजीकृत, दोनों प्रकार के पात्र करदाताओं पर लागू होंगी।

विभाग की योजना दुर्गा पूजा के बाद इस विषय पर अभियान चलाने की है। इसके साथ जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे और संबंधित विभागों के अधिकारियों की मदद ली जाएगी। निबंधन में रुचि नहीं लेने वाले पात्र प्रतिष्ठानों के विरुद्ध विभागीय प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

इस पहल का उद्देश्य व्यावसायिक गतिविधियों का कर संबंधी रिकॉर्ड व्यवस्थित करना और राजस्व संग्रह का दायरा बढ़ाना है। हालांकि, किसी प्रतिष्ठान पर कर लागू होगा या नहीं, इसका निर्णय उसके कारोबार, पात्रता और अधिनियम की शर्तों के अनुसार ही किया जाएगा। विभागीय सूचियां मिलने के बाद पात्र संस्थानों की पहचान अधिक स्पष्ट हो सकेगी।