गेतलसूद फ्लोटिंग सोलर प्लांट से पूरी क्षमता पर उत्पादन शुरू, रांची को मिलेगी 100 मेगावाट बिजली

रांची के गेतलसूद डैम में स्थापित फ्लोटिंग सोलर प्लांट ने 100 मेगावाट की पूरी क्षमता से व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है। बिजली गेतलसूद और इरबा ग्रिड के रास्ते वितरित की जाएगी।

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गेतलसूद डैम में स्थापित 100 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट

रांची जिले के गेतलसूद डैम में स्थापित फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट से 100 मेगावाट की पूरी क्षमता पर व्यावसायिक बिजली उत्पादन शुरू हो गया है। परियोजना प्रबंधन के अनुसार, प्लांट ने 2 अक्टूबर से पूर्ण क्षमता पर काम करना शुरू किया। इससे उत्पादित बिजली रांची और आसपास के क्षेत्रों में भेजी जाएगी।

प्लांट से पहले 29 अगस्त से 50 मेगावाट बिजली का आंशिक उत्पादन हो रहा था। शेष इकाइयों पर काम पूरा होने के बाद उत्पादन बढ़ाकर 100 मेगावाट कर दिया गया। परियोजना प्रबंधक नवीन उरांव के मुताबिक, पूर्ण क्षमता से उत्पादन शुरू होने की सूचना दिल्ली मुख्यालय को भेज दी गई है। औपचारिक उद्घाटन की तारीख और अतिथि पर निर्णय अभी होना है।

करीब 437 करोड़ रुपये की इस परियोजना का निर्माण लार्सन एंड टूब्रो ने सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की निगरानी में किया है। परियोजना को विश्व बैंक से वित्तीय सहायता मिली है, जबकि सिंचाई विभाग ने ग्रिड के निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराई। प्लांट की निर्धारित अवधि 25 वर्ष है और शुरुआती पांच वर्षों तक इसके रखरखाव की जिम्मेदारी निर्माण कंपनी के पास रहेगी।

गेतलसूद डैम का जल क्षेत्र लगभग दो हजार हेक्टेयर बताया गया है। इसमें से करीब 172 हेक्टेयर, यानी लगभग आठ प्रतिशत हिस्से में तैरते सौर पैनल लगाए गए हैं। यहां बनने वाली बिजली पहले गेतलसूद ग्रिड और फिर सिकिदिरी स्थित इरबा ग्रिड पहुंचेगी। इसके बाद झारखंड बिजली वितरण निगम इसे संबंधित क्षेत्रों में प्रसारित करेगा।

अधिकारियों का अनुमान है कि प्लांट की 100 मेगावाट क्षमता से लगभग एक लाख घरों की बिजली जरूरत पूरी करने में मदद मिलेगी। रांची और आसपास के इलाकों में निर्बाध आपूर्ति की संभावना भी जताई गई है। हालांकि बिजली आपूर्ति की वास्तविक स्थिति वितरण व्यवस्था और ग्रिड संचालन पर निर्भर करेगी।

परियोजना के शुरुआती चरण में स्थानीय मछुआरा समुदाय ने विस्थापन की आशंका जताते हुए विरोध किया था, जिससे काम लगभग एक वर्ष प्रभावित रहा। बाद में स्थानीय स्तर पर समन्वय के बाद जनवरी 2025 में निर्माण ने दोबारा गति पकड़ी। अब पूर्ण उत्पादन शुरू होने के साथ औपचारिक लोकार्पण की तैयारियां चल रही हैं। स्थानीय स्तर पर गेतलसूद क्षेत्र को भी प्राथमिकता से निर्बाध बिजली देने की मांग उठी है।