गोड्डा जिले के बोआरीजोर प्रखंड की मेघी पंचायत स्थित मेरेडेडे गांव में छह वर्षीय बच्ची की मौत के बाद स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बच्ची की मौत ब्रेन मलेरिया से होने की बात कही गई है। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने सड़क, बिजली तथा पानी की समस्याओं को उठाते हुए अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था।
ग्रामीणों का कहना था कि गांव तक सड़क नहीं होने के कारण मरीजों को समय पर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना कठिन होता है। उनके मुताबिक, बच्ची को भी काफी परेशानी के बाद स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों ने गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को अस्पताल ले जाने में भी दिक्कत होने की बात अधिकारियों के सामने रखी।
सूचना मिलने पर प्रखंड विकास पदाधिकारी मिथिलेश कुमार सिंह, अंचलाधिकारी केदारनाथ सिंह और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सुनील कुमार किस्कु स्वास्थ्य टीम के साथ गांव पहुंचे। टीम ने ग्रामीणों की जांच की। रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच के दौरान बच्चों समेत 11 लोग ब्रेन मलेरिया से संक्रमित पाए गए और सभी को दवा दी गई। स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों की जानकारी भी साझा की गई।
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने गांव में फॉगिंग कराने की बात कही है। हालांकि उपलब्ध विवरण में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि संक्रमित पाए गए लोगों को आगे किस प्रकार की चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाएगा। गांव में सामने आए मामलों के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच और मरीजों की स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
ग्रामीणों ने पेयजल की समस्या भी बताई। उनके अनुसार, गांव में एक सोलर जलमीनार और एक चापाकल है, लेकिन जलस्तर नीचे चले जाने से पर्याप्त पानी मिलने में परेशानी होती है। उन्होंने यह भी कहा कि जून में ट्रांसफॉर्मर लगाए जाने के बावजूद बिजली का कनेक्शन नहीं मिला था और शाम के बाद गांव अंधेरे में रहता है।
बीडीओ ने योजना के तहत गांव में जल्द सड़क बनवाने और जलमीनार तथा चापाकल की मरम्मत के लिए संबंधित विभाग को सूचना देने का आश्वासन दिया। अंचलाधिकारी ने बिजली विभाग से गांव में बिजली बहाल करने को कहा। अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए। अंचलाधिकारी ने आगे किसी समस्या की स्थिति में तत्काल सूचना देने को भी कहा है।