गोड्डा में निजी स्वास्थ्य संस्थानों के निबंधन और मानकों पर जिला स्तरीय कार्यशाला

गोड्डा में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर आयोजित कार्यशाला में अस्पतालों, क्लिनिक और पैथोलॉजी केंद्रों को निबंधन, नवीनीकरण तथा न्यूनतम मानकों की जानकारी दी गई।

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गोड्डा के सिविल सर्जन कार्यालय सभागार में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट, 2010 और झारखंड राज्य क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट नियमावली, 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें स्वास्थ्य संस्थानों के निबंधन, निर्धारित मानकों के पालन और सेवाओं की गुणवत्ता से जुड़े प्रावधानों पर चर्चा हुई।

कार्यशाला की अध्यक्षता क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार लिंडा ने की। कार्यक्रम में जिले के निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम, क्लिनिक और पैथोलॉजी केंद्रों के संचालक एवं प्रतिनिधि शामिल हुए। संबंधित पदाधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों को भी कानून के प्रावधानों की जानकारी दी गई।

प्रतिभागियों को बताया गया कि स्वास्थ्य संस्थानों के लिए अनिवार्य निबंधन और समय पर नवीनीकरण के साथ निर्धारित न्यूनतम मानकों का पालन जरूरी है। कार्यशाला में उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं, चिकित्सकीय सेवाओं और संस्थानों के अभिलेखों के उचित संधारण से संबंधित नियमों को भी समझाया गया।

डॉ. लिंडा ने सभी संबंधित संस्थानों से निर्धारित नियमों और मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा। कार्यशाला में सुरक्षित, सुलभ, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के लिए संस्थानों की जवाबदेही पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम में बताया गया कि इस कानून का उद्देश्य निबंधन और नियमन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा एकरूपता सुनिश्चित करना है। इसके प्रभावी अनुपालन से संस्थानों की जिम्मेदारी तय करने के साथ मरीजों के अधिकारों और आम नागरिकों के हितों की रक्षा में मदद मिलने की बात कही गई।

कार्यशाला में सिविल सर्जन डॉ. सुभाष चंद्र शर्मा, जिला आरसीएच पदाधिकारी डॉ. निर्मला बेसरा, स्टेट कंसल्टेंट संजय कुमार सहित जिले के निजी चिकित्सक और क्लिनिक संचालक उपस्थित रहे। आयोजन का केंद्र स्वास्थ्य संस्थानों को लागू प्रावधानों से अवगत कराना और उनके स्तर पर जरूरी अनुपालन सुनिश्चित करना रहा।