सिमडेगा में संक्रामक और पशुजनित रोगों की निगरानी के लिए चार विशेष टीमों का प्रस्ताव

जिला स्तरीय बैठक में बीमारियों की समय पर पहचान और रोकथाम के लिए स्वास्थ्य, पशुपालन, कृषि समेत विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया।

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सिमडेगा जिले में संक्रामक और पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियों की समय पर पहचान तथा रोकथाम के लिए प्रशासन ने संयुक्त व्यवस्था बनाने की तैयारी शुरू की है। मंगलवार को डीडीसी दीपांकर चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिला स्तरीय स्वास्थ्य समिति और संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल के गठन व प्रभावी संचालन पर विचार किया गया।

बैठक में मानव, पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य को परस्पर जुड़ा मानते हुए अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया गया। चर्चा का उद्देश्य बीमारी फैलने की स्थिति में संबंधित विभागों को एक साझा व्यवस्था के तहत निगरानी और नियंत्रण के काम से जोड़ना रहा।

अधिकारियों के अनुसार जिले में रेबीज, मलेरिया, डेंगू, स्क्रब टाइफस, एंथ्रेक्स और ब्रुसेलोसिस जैसी बीमारियों पर निगरानी जरूरी है। दूषित भोजन और पानी से होने वाली बीमारियों को भी प्रस्तावित व्यवस्था के दायरे में रखने की बात सामने आई।

संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल के अंतर्गत चार विशेष टीमें बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। ये टीमें खाद्य जनित रोग, मच्छर जनित रोग, टीकाकरण से रोकी जा सकने वाली बीमारियों और पशुजनित रोगों की निगरानी तथा नियंत्रण के लिए अलग-अलग काम करेंगी।

प्रस्ताव के मुताबिक इन टीमों में स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग के साथ कृषि, वन, पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा तथा पेयजल विभाग के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय करने और नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करने पर भी चर्चा हुई। प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास और विभागों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को तैयारियों का हिस्सा माना गया है।

बैठक में सिविल सर्जन डॉ. सुंदर मोहन सामद, जिला निगरानी पदाधिकारी डॉ. सिलवंत एक्का और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। प्रस्तावित टीमों के गठन से बीमारी की सूचना मिलने पर संबंधित विभागों को एक साथ सक्रिय करने और रोकथाम की कार्रवाई को समन्वित करने की प्रशासनिक व्यवस्था तैयार करने का लक्ष्य है।