गोड्डा व्यवहार न्यायालय परिसर के पुस्तकालय सभागार में गुरुवार को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण से संबंधित एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से हुए कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों, पुलिस पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं, मध्यस्थों और बीमा कंपनी के प्रतिनिधि ने दावा प्रक्रिया को समय पर पूरा करने की जरूरत पर चर्चा की।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश कुमार ने कहा कि मोटर दुर्घटना में परिवार के मुख्य आय-स्रोत व्यक्ति की मृत्यु होने पर आश्रितों को दावा राशि शीघ्र मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि अनुसंधानकर्ता की रिपोर्ट समय पर नहीं पहुंचने से दावे के निपटारे में परेशानी आती है। पुलिस पदाधिकारियों से रिपोर्ट निर्धारित अवधि में ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से अधिकरण को सौंपने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।
जिला जज प्रथम कुमार पवन ने मोटर दुर्घटना दावा मामलों में पुलिस विभाग की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, अनुसंधानकर्ता को संबंधित प्रक्रिया और प्रपत्रों की पूरी जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने नए प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुर्घटना के 48 घंटे के भीतर अधिकरण को रिपोर्ट दी जानी है। प्राथमिकी दर्ज करने के चरण से ही आवश्यक सूचनाएं जुटाने पर भी जोर दिया गया।
जिला जज द्वितीय निरूपम कुमार ने दुर्घटना के मामलों में कानूनी प्रक्रिया के साथ मानवीय संवेदना को भी महत्व देने की बात कही। तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ऋचा श्रीवास्तव ने कहा कि निर्धारित समय में प्रपत्र जमा नहीं होने पर दावा निपटाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। उन्होंने अधिकारियों से इस जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाने का आग्रह किया।
अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी आकाश भारद्वाज ने मोटर वाहन दुर्घटनाओं से जुड़े प्रावधानों की जानकारी साझा की। उन्होंने अनुसंधानकर्ताओं को जांच के दौरान सभी आवश्यक पहलुओं पर ध्यान देने की सलाह दी। कार्यशाला में दावा संबंधी दस्तावेज तैयार करने और उन्हें समय पर संबंधित मंच तक पहुंचाने की आवश्यकता प्रमुख विषय रही।
जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सुशील कुमार झा ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं और दावा प्रक्रिया को लेकर जागरूकता अभियान चलाने का सुझाव दिया। कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता एवं मध्यस्थ नूतन तिवारी ने किया, जबकि जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव दीपक कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यशाला में विभिन्न न्यायिक और पुलिस पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।