गोपीकांदर में ग्रामीणों का चक्का जाम, कोयला खदान का काम और वाहनों की आवाजाही प्रभावित

दुमका के गोपीकांदर में ग्रामीणों ने जनसुनवाई और मुआवजे से जुड़ी मांगों को लेकर खदान मार्ग रोका। सोमवार को वाहनों का परिचालन और उत्खनन कार्य प्रभावित रहा।

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गोपीकांदर के खदान क्षेत्र के बाहर प्रदर्शन करते स्थानीय ग्रामीण

दुमका जिले के गोपीकांदर प्रखंड में सोमवार को स्थानीय ग्रामीणों ने नवेली उत्तर प्रदेश पावर प्रोजेक्ट लिमिटेड की कोयला खदान से जुड़े मुद्दों को लेकर चक्का जाम किया। ओड़मो पंचायत के जंगलटोला में हुए प्रदर्शन के कारण खदान क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही और कोयला उत्खनन का काम दिनभर प्रभावित रहा।

आदिवासी-मूलवासी प्रभावित संघर्ष समिति के आह्वान पर बड़ी संख्या में महिला और पुरुष ग्रामीण खदान की ओर जाने वाले मार्ग पर जुटे। प्रदर्शनकारियों ने कंपनी अधिकारियों के वाहनों, विस्फोटक सामग्री ले जाने वाले वाहन और खनन कार्य से जुड़े अन्य वाहनों को आगे बढ़ने से रोककर वापस लौटा दिया।

समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रभावित गांवों की समस्याओं को लेकर कंपनी प्रबंधन, अंचल अधिकारी और जिला प्रशासन को पहले भी ज्ञापन दिए गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उनकी मांगों पर अब तक ठोस पहल नहीं हुई। वे प्रभावित परिवारों के साथ जनसुनवाई और मुआवजा, रोजगार, विस्थापन, पर्यावरण, स्वास्थ्य तथा स्वच्छ पेयजल से जुड़े विषयों पर स्पष्ट जानकारी चाहते हैं।

इसी दौरान कुंडापहाड़ी में विस्थापन की स्थिति का सामना कर रहे करीब 50 पहाड़िया परिवारों ने भी मुआवजे की मांग उठाई। इन परिवारों ने खनन में लगे हाइवा और अन्य वाहनों को रोक दिया। उनका दावा है कि जमीन का अधिग्रहण हो चुका है, लेकिन उन्हें अब तक मुआवजे का भुगतान नहीं मिला है, जबकि दूसरे गांवों के कुछ प्रभावित परिवारों के खातों में राशि भेजी जा चुकी है।

ग्रामीणों ने मुआवजे की प्रस्तावित राशि को लेकर भी अलग-अलग जानकारी मिलने का आरोप लगाया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि भुगतान और उससे जुड़ी शर्तों पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। संघर्ष समिति ने यह भी मांग रखी कि खदान से प्रभावित सभी गांवों के लोगों के साथ औपचारिक जनसुनवाई कर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए।

प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन को शांतिपूर्ण बताया और कहा कि मांगों पर ध्यान नहीं दिए जाने की स्थिति में विरोध जारी रखा जा सकता है। सोमवार के चक्का जाम से खदान का संचालन प्रभावित रहा। उपलब्ध विवरण में कंपनी या जिला प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों के आरोपों और मांगों पर कोई प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।