देवघर में पशुधन योजना से करीब 500 पशुओं का वितरण, किसानों को प्रशिक्षण भी

देवघर में आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को पशुपालन और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए बकरी, सूअर, मुर्गी, बतख तथा अन्य पशुधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

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देवघर में पशुधन वितरण योजना के तहत किसानों को दी जा रही सहायता

देवघर जिले में आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को पशुपालन के जरिये स्वरोजगार से जोड़ने के लिए पशुधन वितरण योजना चलाई जा रही है। जिला पशुपालन विभाग के अनुसार, वर्ष 2021-22 में योजना के तहत काम शुरू होने के बाद से अब तक करीब 500 पशुओं का वितरण किया गया है। लाभुकों को उनकी जरूरत और पशुधन की श्रेणी के आधार पर अलग-अलग योजनाओं से जोड़ा जाता है।

योजना में बकरी, भेड़, सूअर, गाय, बतख और मुर्गी पालन के लिए सहायता का प्रावधान है। जिला पशुपालन पदाधिकारी धनंजय कुमार के मुताबिक, पात्र किसानों को समय-समय पर पशुधन उपलब्ध कराया जाता है। विभाग का कहना है कि इसका उद्देश्य किसानों के लिए अतिरिक्त आय का साधन तैयार करना और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देना है।

विभागीय जानकारी के अनुसार, बकरी पालन के लिए करीब 50 हजार रुपये निर्धारित हैं और इसके तहत लगभग आठ से दस बकरियां दी जाती हैं। सूअर पालन योजना में करीब 58 हजार रुपये की व्यवस्था है, जिससे पांच सूअर उपलब्ध कराए जाते हैं। बतख पालन के लिए करीब पांच हजार रुपये की सहायता दिए जाने की जानकारी भी दी गई है।

मुर्गी पालन में ब्रॉयलर इकाई के लिए करीब 67 हजार रुपये और अच्छी नस्ल की मुर्गियों के लिए करीब 1.80 लाख रुपये तक आवंटित किए जाते हैं। इसके तहत लाभुक को लगभग 400 चूजे मिल सकते हैं। निर्धारित राशि लाभुक के खाते में भेजी जाती है, जिसके बाद पशुधन की खरीद के लिए संबंधित विक्रेता के खाते में भुगतान किया जाता है।

खेती की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष किसानों को 54 जोड़ी बैल उपलब्ध कराने का लक्ष्य भी रखा गया है। पशुधन देने से पहले लाभुकों को देखभाल, पालन-पोषण और प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके लिए जिले के विभिन्न प्रखंडों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। विभाग के अनुसार, योजना में किसानों और पशुपालकों को 70 से 90 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है।

कुछ किसानों ने योजना की जानकारी और आवेदन प्रक्रिया को लेकर सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की शिकायत की है। इस पर जिला पशुपालन पदाधिकारी ने कहा कि जानकारी से वंचित किसान सीधे जिला पशुपालन कार्यालय में प्रक्रिया समझ सकते हैं। विभाग का कहना है कि सही मार्गदर्शन मिलने से पात्र लाभुकों को योजना से जोड़ने और अनावश्यक भटकाव कम करने में मदद मिलेगी।