झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने गोमिया विधानसभा क्षेत्र की लंबित ग्रामीण पेयजल योजनाओं पर सख्त रुख अपनाया है। रांची के नेपाल हाउस में हुई समीक्षा बैठक में उन्होंने जिन योजनाओं पर अब तक काम शुरू नहीं हुआ है, वहां 15 दिनों के भीतर कार्य आरंभ कराने का निर्देश दिया। तय अवधि में काम शुरू नहीं करने वाले संवेदकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया है।
बैठक में धनबाद अंचल के अंतर्गत आने वाली तेनुघाट बहु-ग्रामीण जलापूर्ति और एकल ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। मंत्री ने लंबित कार्यों को गंभीरता से पूरा कराने के साथ क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का भी निर्देश दिया।
योजनाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए राज्य स्तर की एक उच्चस्तरीय टीम गठित कर स्थलीय निरीक्षण कराने को कहा गया है। अधिकारियों को केवल कागजी प्रगति पर निर्भर नहीं रहने, क्षेत्र का भ्रमण करने और ग्रामीणों से सीधे बातचीत कर जलापूर्ति संबंधी समस्याओं की जानकारी लेने का निर्देश मिला है। भौतिक प्रगति, भुगतान और घरों में क्रियाशील नल कनेक्शन की स्थिति भी जांच के दायरे में रहेगी।
समीक्षा में रखे गए आंकड़ों के अनुसार गोमिया के 52,689 घरों में से 35,191 घर नल-जल से जुड़े हैं। कसमार में 18,574 में से 7,499 और पेटरवार में 32,687 में से 21,799 घरों तक नल कनेक्शन पहुंचने की जानकारी दी गई।
इसी तरह नावाडीह में कुल 26,625 घरों में से 14,437 घर नल-जल से जुड़े बताए गए। चंद्रपुरा में 11,162 घरों में से 9,834 घरों को नल जलापूर्ति से जोड़े जाने का आंकड़ा बैठक में प्रस्तुत किया गया। मंत्री ने जल जीवन मिशन के तहत सुरक्षित और नियमित पेयजल उपलब्ध कराने के लक्ष्य में किसी तरह की शिथिलता स्वीकार नहीं करने की बात कही।
बैठक में जल जीवन मिशन के अभियान निदेशक, अभियंता प्रमुख, मुख्य अभियंता, परियोजना प्रबंधन इकाई तथा धनबाद, चास और तेनुघाट से जुड़े अभियंता शामिल हुए। विभाग को अब योजनाओं की मौके पर प्रगति, भुगतान की स्थिति और कनेक्शनों की उपयोगिता का सत्यापन कर शिकायतों के शीघ्र समाधान की दिशा में काम करना है।