चतरा जिले के टंडवा प्रखंड स्थित हेसातु गांव का प्राथमिक विद्यालय कभी छह महीने से बंद था और वहां एक भी बच्चा पढ़ने नहीं आता था। सितंबर 2001 में पदस्थापित शिक्षक बिनेश्वर कुमार ने बच्चों को विद्यालय से जोड़ने की पहल की। लगातार प्रयासों के बाद अब इस विद्यालय में 300 बच्चे पढ़ रहे हैं।
पदस्थापन के समय बिनेश्वर कुमार की उम्र करीब 22-23 वर्ष थी। विद्यालय का दो कमरों वाला भवन जर्जर था, खिड़कियां टूटी हुई थीं और बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। नक्सल गतिविधियों के उस दौर में उन्हें विद्यालय पहुंचने के लिए 16 किलोमीटर का दुर्गम रास्ता भी तय करना पड़ता था।
विद्यालय में विद्यार्थियों की अनुपस्थिति को देखते हुए उन्होंने गांव के घरों तक पहुंचना शुरू किया। वह प्रतिदिन सुबह घर-घर जाकर बच्चों को विद्यालय लाते थे। बच्चों की रुचि बढ़ाने और उन्हें पढ़ाई से जोड़ने के लिए फुटबॉल, रस्सी और चॉकलेट जैसे माध्यमों का भी सहारा लिया गया।
धीरे-धीरे ग्रामीणों का भरोसा बढ़ा और वे बिनेश्वर कुमार को स्नेह से ‘छोटे सर’ कहने लगे। उन्होंने कक्षाओं तक अपनी भूमिका सीमित नहीं रखी। ग्रामीणों को अंधविश्वास, बाल विवाह, नशाखोरी और पर्यावरण संरक्षण के विषय में जागरूक करने की गतिविधियां भी चलायीं।
विद्यालय और आसपास की व्यवस्था सुधारने में ग्रामीणों का सहयोग भी मिला। पहाड़ी रास्ते का निर्माण कराया गया। विद्यालय परिसर में 200 फीट लंबी गार्डवाल बनाकर जमीन का समतलीकरण भी कराया गया, जिससे परिसर के विकास की दिशा में आगे काम हो सका।
बिनेश्वर कुमार को वर्ष 2022 में राज्यस्तरीय उत्कृष्ट शिक्षक पुरस्कार मिला था। पुरस्कार के रूप में प्राप्त एक लाख रुपये उन्होंने विद्यालय के खेल मैदान के विकास में लगा दिए। वर्तमान में वह इसी विद्यालय के प्रधानाध्यापक हैं। बंद पड़े विद्यालय से 300 विद्यार्थियों वाले स्कूल तक का यह बदलाव शिक्षक और ग्रामीण समुदाय के लंबे प्रयास को रेखांकित करता है।